
सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न सरकारी विभागों में 563 ग्रेड-I पदों को भरने के लिए तेलंगाना लोक सेवा आयोग (टीजीपीएससी) द्वारा आयोजित परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है और कहा है कि इस तरह के आदेश से ‘अराजकता’ पैदा होगी। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने की।
बता दें कि टीजीपीएससी द्वारा आयोजित ग्रुप-I मुख्य परीक्षा सोमवार को शुरू हुई है और 27 अक्तूबर तक जारी रहेगी। परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परीक्षा आज होनी है और छात्र पहले ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश कर चुके हैं। ऐसी स्थिति में परीक्षा पर रोक लगाने के आदेश से “अराजकता” पैदा होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अंतरिम रोक लगाने का दबाव डाला तो बेंच ने कहा, “परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होनी है… अगर हम इस स्तर पर परीक्षा रोक देंगे तो अराजकता होगी।” बेंच ने आगे कहा, “परीक्षा आज होनी है। छात्र पहले ही परीक्षा केंद्रों में प्रवेश कर चुके हैं।”
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अभ्यर्थी राज्य में पहली बार आयोजित की जा रही परीक्षा में बैठने का मौका खो देंगे। कुल 31,383 उम्मीदवार मुख्य परीक्षा के लिए योग्य पाए गए हैं। ये परीक्षाएं तेलंगाना के गठन के बाद पहली बार आयोजित की जा रही हैं और आखिरी बार 2011 में आयोजित की गई थीं।
सरकारी आदेश (जीओ) के अनुसार टीजीपीएससी द्वारा अपनाई जा रही कोटा नीति को पोगुला रामबाबू ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि तेलंगाना उच्च न्यायालय इस मामले से अवगत है और उसने उच्च न्यायालय से कहा कि वह परिणाम घोषित होने से पहले इस मामले पर निर्णय ले।
अभ्यर्थी परीक्षाओं के पुनर्निर्धारण की मांग करने वाले सरकारी आदेश का इस आधार पर विरोध कर रहे हैं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग इसके आरक्षण प्रावधानों के तहत पीड़ित हैं।




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