
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली ने स्वास्थ्य सेवाओं में कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की परिवर्तनकारी शक्तियों का लाभ उठाने के वास्ते चिकित्सकों को जरूरी कौशल एवं ज्ञान से लैस करने के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों खासकर एआई पर एक कार्यशाला का आयोजन किया।
एम्स में संज्ञानात्मक न्यूरोफिज़ियोलॉजी और पोषण प्रयोगशाला की प्रभारी डॉ. कंवलप्रीत कोचर ने कहा कि मंगलवार को आयोजित कार्यशाला में एआई और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र के दिग्गज एक साथ आए। उन्होंने कहा, “एआई के व्यावहारिक अनुप्रयोगों और वास्तविक दुनिया की चुनौतियों पर ध्यान केंद्रित करके, हम अपने भविष्य के स्वास्थ्य सेवा लीडर्स को नवाचार करने और रोगी परिणामों में उल्लेखनीय सुधार करने के लिए तैयार कर रहे हैं।”
हेल्थकेयर मार्केटिंग एजेंसी हेल्थप्रेसो के संस्थापक डॉ. स्वदीप श्रीवास्तव ने कहा कि एआई स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के तरीके में एक बड़ा बदलाव लाएगा क्योंकि यह विशाल डेटा का विश्लेषण कर सकता है, पैटर्न की खोज कर सकता है और अच्छे निर्णय ले सकता है जिससे रोगी देखभाल में सुधार होगा।
श्रीवास्तव ने कहा, “हालांकि, इस शक्ति के साथ जिम्मेदारी भी आती है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एआई को नैतिक और न्यायसंगत तरीके से लागू किया जाए, ताकि समाज को वास्तव में लाभ पहुंचाने के लिए पूर्वाग्रहों और गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर किया जा सके।”
मोहाली स्थित सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) की वैज्ञानिक सोनिया दोसांझ ने स्वास्थ्य सेवा में तकनीकी हस्तक्षेप के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “एआई डेटा-संचालित निर्णय लेने, रोग निगरानी और व्यक्तिगत उपचार योजनाओं में अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। यह कार्यशाला इन अवसरों का दोहन करने की दिशा में एक कदम है।”
कार्यशाला में स्वास्थ्य सेवा में विशेष एआई अनुप्रयोगों, स्वास्थ्य जीपीटी के विकास आदि की आवश्यकता पर जोर दिया गया।




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