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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा फिलहाल बरकरार रहेगा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसख्यंक दर्जे पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुना दिया। कोर्ट का कहना है कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक अल्पसंख्यक दर्जा फिलहाल बरकरार रहेगा। यानी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एक अल्पसंख्यक संस्थान बना रहेगा। कोर्ट ने 4-3 के बहुमत से यह फैसला सुनाया। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में सात जजों की बेंच ने यह ऐतिहासिक फैसला लिया। यह फैसला 4:3 से पारित हुआ। मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ में से खुद सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस संजीव खन्ना, जस्टिस जेडी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा ने संविधान के अनुच्छेद 30 के मुताबिक अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे को फिलहाल कायम रखने के पक्ष में फैसला दिया। पीठ में शामिल जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा का फैसला अलग है। लेकिन साथ में यह भी साफ किया गया कि एक नई बेंच इसको लेकर गाइडलाइंस बनाएगी। CJI ने अपने फैसले में बताया कि एक 3 सदस्यीय नियमित बेंच अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जे पर फाइनल फैसला करेगी। यह बेंच 7 जजों की बेंच के फैसले के निष्कर्षों और मानदंड के आधार पर AMU के अल्पसंख्यक दर्जे के बारे में अंतिम फैसला लेगी।

गौरतलब है कि साल 2006 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को अल्पसंख्यक संस्थान नहीं माना था। उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई, जिस पर सुनवाई पूरी कर सुप्रीम कोर्ट ने बीती 1 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलटते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अल्पसंख्यक दर्जे को फिलहाल बरकरार रखने का फैसला सुनाया। इस फैसले को लेकर सभी की निगाहें लगी हुई थीं, क्योंकि इसका असर जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी पर भी पड़ सकता था।

साल 2019 में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने मामले को सात जजों की पीठ के पास भेज दिया था। सुनवाई के दौरान सवाल उठा था कि क्या कोई विश्वविद्यालय, जिसका प्रशासन सरकार द्वारा किया जा रहा है, क्या वह अल्पसंख्यक संस्थान होने का दावा कर सकता है?  

गौरतलब है कि साल 1967 में अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक दर्जा खारिज कर दिया था। हालांकि साल 1981 में सरकार ने एएमयू एक्ट में संशोधन कर विश्वविद्यालय का अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा फिर से बरकरार कर दिया गया था। वर्ष 1981 में एएमयू संस्थान के अल्पसंख्यक स्वरूप की बहाली के बाद वर्ष 2004 में मनमोहन सिंह की सरकार की ओर से एक पत्र में कहा गया था कि यह अल्पसंख्यक संस्थान है, इसलिए वह अपनी दाखिला नीति में परिवर्तन कर सकता है। तत्कालीन केंद्र सरकार की अनुमति के बाद विश्वविद्यालय ने वर्ष 2004 में एमडी–एमएस के विद्यार्थियों के लिए प्रवेश नीति बदलकर आरक्षण प्रदान किया। 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी को अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे के खिलाफ पंडित डॉ नरेश अग्रवाल व अन्य इलाहबाद हाईकोर्ट चले गए, जहां सुनवाई के दौरान एकल पीठ का फैसला अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के खिलाफ आया। युगल पीठ का फैसला भी विश्वविद्यालय के खिलाफ था। उसके बाद विश्वविद्यालय ने सुप्रीम कोर्ट की शरण ली, जहां आदेश दिया गया कि जब तक कोई सबूत नहीं मिलता तब तक यथास्थिति बनी रहेगी, लेकिन बीजेपी सरकार ने एएमयू के पक्ष में दाखिल हलफनामे को चुनौती दी। 

Asmita Sarkar

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