
यह तो एक सर्वविदित तथ्य है कि भारत में मेडिकल सीट नहीं मिलने की वजह से भारतीय स्टूडेंट्स विदेश का रूख करते हैं। लेकिन क्या सिर्फ यही एक वजह है? क्या भारत के मुकाबले विदेश में MBBS की पढ़ाई करने के अन्य कोई फायदे नहीं हैं? दरअसल, विदेश में यह पढ़ाई कई मायनों में भारत के मुकाबले फायदेमंद होती है, और यही वजह है कि भारत में मेडिकल सीट नहीं मिलने की वजह से विदेश जाने वाले छात्रों के साथ साथ बड़ी तादाद में वैसे भारतीय छात्र भी MBBS की पढ़ाई करने के लिए विदेश का रुख करते हैं, जिन्हें वहां इस पढाई में फायदे नज़र आते हैं। आखिर वे फायदे क्या हैं, डालते हैं एक नज़र :
टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका
विदेश में एमबीबीएस का कोर्स करने का सबसे बड़ा फायदा ये होता है कि आपको टॉप यूनिवर्सिटी में पढ़ने का मौका मिलता है। उन विश्वविद्यालयों में भारत की तरह ही यूनिवर्सिटीज और इंस्टीट्यूट्स छात्रों को बेहतरीन सुविधाएं मिलती हैं। इसके अलावा विदेश में पढ़ने वाले छात्र नोबेल पुरस्कार विजेताओं के साथ भी काम कर पाते हैं।
कोर्स की लागत कम और सैलरी मोटी
एब्रॉड में कई देश ऐसे हैं जहां MBBS की पढ़ाई भारत के मुकाबले काफी सस्ती है। इन देशों में वीजा, ट्यूशन फीस और रहने का खर्च मिलाकर भी भारत के प्राइवेट कॉलेजों से कम होता है। पढ़ाई खत्म होने के बाद छात्र प्रैक्टिस कर पाते हैं और उन्हें अच्छी सैलरी वाली नौकरियां भी मिल जाती हैं। ऐसे देशों में रूस एक सबसे बढ़िया उदाहरण है।
सीटों की अधिक संख्या
विदेश में मेडिकल सीट हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में पर्याप्त होती हैं। भारत के मुकाबले बाहर कई देशों में मेडिकल सीट पर्याप्त हैं। भारत में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटें काफी कम हैं। प्राइवेट कॉलेजों की फीस बहुत ज्यादा है, जिस वजह से छात्र देश में MBBS नहीं कर पाते हैं। हालांकि, विदेशी यूनिवर्सिटीज में सीटें काफी ज्यादा होती हैं। छात्रों से फीस भी कम ली जाती हैं और पढ़ाई भी अच्छी होती है।
मिलती है अच्छी स्कॉलरशिप
बाहर जाकर MBBS की पढ़ाई करने से ये फायदा भी होता है कि आपको कई तरह की अच्छी स्कॉलरशिप और आर्थिक मदद मिल जाती है। वैसे कई दूसरी संस्थाएं भी भारतीय छात्रों को स्कॉलरशिप देती हैं, ताकि वे विदेश में जाकर MBBS की पढ़ाई कर डॉक्टर बन पाएं।




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