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अंग्रेजी बोलने में भारत का औसत दुनिया से ज़्यादा, देश में दिल्ली सबसे आगे

अंग्रेजी बोलने में भारतीयों का कौशल वैश्विक औसत से कहीं बेहतर है। अंग्रेजी बोलने की क्षमता में भारतीयों का औसत स्कोर 57 है, जो वैश्विक औसत 54 से अधिक है। वहीं, देश की बात करें, तो 63 के औसत स्कोर के साथ दिल्ली सबसे आगे है। 60 के स्कोर के साथ राजस्थान दूसरे और 58 अंक के साथ पंजाब तीसरे स्थान पर है। यह जानकारी पियर्सन ग्लोबल इंग्लिश प्रोफिशियंसी रिपोर्ट-2024 में सामने आई है। सोमवार को जारी रिपोर्ट में भारत, फिलीपीन, जापान, मिस्र और यूरोप जैसे देशों में अंग्रेजी कौशल के रुझानों का विश्लेषण किया गया है।

पियर्सन की रिपोर्ट लगभग 7,50,000 वर्सेंट टेस्ट के डाटा पर आधारित है। वर्सेंट अंग्रेजी भाषा मूल्यांकन उपकरण है, जो उम्मीदवारों की अंग्रेजी भाषा प्रवीणता का सटीक और कुशलतापूर्वक मूल्यांकन करता है। पियर्सन के इस टेस्ट में आम तौर पर पढ़ना, दोहराना, लघु उत्तरीय प्रश्न, वाक्य निर्माण, कहानी पुनर्कथन और खुले प्रश्न जैसे छह टेस्ट होते हैं, जो अंग्रेजी भाषा की क्षमताओं को सटीक तौर से मापते हैं। कंपनियां अपनी जरूरतों के मुताबिक इन टेस्ट का इस्तेमाल सही अंग्रेजी कौशल वाले उम्मीदवारों को खोजने के लिए करती हैं। अंग्रेजी कौशल पर ध्यान केंद्रित करके कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के साथ ही विकास को रफ्तार दे सकती हैं। पियर्सन के इंग्लिश लैंग्वेज लर्निंग डिवीजन के अध्यक्ष जियोवानी जियोवानेली के मुताबिक, आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था में अंग्रेजी में पारंगत होना महज हुनर नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण संपत्ति है।

अंग्रेजी कौशल में भारत का औसत स्कोर 52 है, जो वैश्विक औसत (57) से कम है। वहीं, अंग्रेजी लेखन स्कोर (61) वैश्विक औसत के बराबर है। यह सुधार डिजिटल संचार के बढ़ते इस्तेमाल और वैश्विक व्यापार में लिखित अंग्रेजी की बढ़ती जरूरत की वजह से हुआ है। वित्त और बैंकिंग क्षेत्र का बोलने का स्कोर सबसे अधिक (63) है, जो वैश्विक औसत 56 से अधिक है। अंग्रेजी के मामले में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का स्कोर सबसे कम (45) है। संभवतः इस क्षेत्र के तेजी से विस्तार और अधिक नौकरियां सृजित करने पर ध्यान केंद्रित करने की वजह से ऐसा है। तकनीक, परामर्श और बीपीओ अंग्रेजी कौशल में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।

हाल के वर्षों में भारत ने अंग्रेजी कौशल में काफी प्रगति की है, खासकर आवाज आधारित टेस्ट में। यह प्रगति भविष्य में भी जारी रहने की उम्मीद है क्योंकि कंपनियां बेहतर प्रतिभा वाले उम्मीदवारों को भर्ती करने और गलतियों को कम करने की कोशिश कर रही हैं।

Asmita Sarkar

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