
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने राज्य विधानसभा में कुलपतियों की नियुक्ति के लिए यूजीसी के नए मसौदा नियमों के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया। मुख्यमंत्री ने कहा, “यह विधानसभा मानती है कि हाल ही में यूजीसी के मसौदा नियमों को वापस लिया जाना चाहिए। वे संघवाद के विचार पर हमला हैं और वे तमिलनाडु की उच्च शिक्षा प्रणाली को प्रभावित करते हैं।”
तमिलनाडु विधानसभा में बोलते हुए सीएम एमके स्टालिन ने कहा, “नई शिक्षा नीति शिक्षा प्रणाली को खराब करने के लिए थोपी जा रही है…. हमने NEET परीक्षा के कारण बहन अनीता को खो दिया। NEET कदाचार से भरा हुआ है।”
मालूम हो कि 6 जनवरी को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति और पदोन्नति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के उपाय) विनियम, 2025 का मसौदा पेश किया है, जिसमें कुलपति और फैकल्टी नियुक्तियों के लिए चयन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
यूजीसी के नए नियम राज्यों में राज्यपालों को कुलपतियों की नियुक्ति के लिए व्यापक अधिकार प्रदान करते हैं। साथ ही कहते हैं कि अब वीसी का पद शिक्षाविदों तक सीमित नहीं है, बल्कि उद्योग विशेषज्ञों और सार्वजनिक क्षेत्र के दिग्गजों को भी वीसी बनाया जा सकता है।




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