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अब M.Ed होगा एक साल का, अगले सत्र से होगी शुरुआत

देश में मास्टर ऑफ एजुकेशन (M.Ed) अब दो साल की जगह एक साल का होगा। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने इस बदलाव की घोषणा की है, जिससे B.Ed पास छात्रों के लिए यह एक बड़ी राहत होगी। NCTE के चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा के अनुसार, एक साल का M.Ed कोर्स 2026-27 सत्र से शुरू होगा और उसी वर्ष से दो साल के M.Ed प्रोग्राम में प्रवेश बंद कर दिया जाएगा।

किन छात्रों को मिलेगा लाभ?
– नए नियमों के तहत, निम्नलिखित श्रेणी के छात्र एक साल के M.Ed कोर्स के लिए पात्र होंगे:एक साल का B.Ed पूरा कर चुके छात्र
– दो साल का ग्रेजुएशन टीचिंग प्रोग्राम पूरा करने वाले छात्र
– चार साल के इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम (ITEP) वाले छात्र

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत बदलाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की सिफारिशों के आधार पर UGC ने जून 2024 में नए पोस्ट-ग्रेजुएट कोर्सेस के लिए गाइडलाइंस जारी की थीं। उन्हीं दिशानिर्देशों के तहत अब एक साल का M.Ed प्रोग्राम लॉन्च किया जा रहा है।

2025 में संस्थानों से आवेदन, 2026-27 से कोर्स की शुरुआत
NCTE चेयरमैन प्रो. पंकज अरोड़ा के अनुसार, 2025 में टीचिंग संस्थानों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, और 2026-27 के सत्र से यह कोर्स औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगा। यह बदलाव उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षक तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

सिलेबस और गुणवत्ता पर रहेगा विशेष ध्यान
– सिलेबस तैयार करने में गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जाएगी।
– NCTE मौजूदा समय की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए नया कोर्स डिजाइन कर रहा है।
– B.Ed और M.Ed कोर्सेस में समानता का सिद्धांत लागू होगा।

B.Ed के क्षेत्र में अन्य बदलाव
NCTE 10 साल बाद फिर से एक साल का B.Ed प्रोग्राम शुरू कर रहा है। साथ ही, कई नए स्पेशलाइज्ड टीचर एजुकेशन प्रोग्राम भी लॉन्च किए जाएंगे, जिनमें शामिल हैं:ITEP – – – योगा एजुकेशन
– ITEP फिजिकल एजुकेशन
– ITEP संस्कृत
– ITEP परफॉर्मिंग आर्ट एजुकेशन

उच्च स्तरीय समिति तैयार कर रही नया पाठ्यक्रम
इन नए कोर्सेस के लिए 8 सदस्यों की एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित की गई है, जो यह सुनिश्चित करेगी कि:

– टीचर ट्रेनिंग कोर्सेस का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
– सभी B.Ed प्रोग्राम—एक साल, दो साल या चार साल—की गुणवत्ता एक समान हो।
– शिक्षा प्रणाली को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार ढाला जाए।

यह बदलाव भारत में शिक्षक शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Asmita Sarkar

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