
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने आईआईटी-जेईई परीक्षाओं में छात्रों की सफलता को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने पर आईआईटीयन प्रशिक्षण केंद्र (IITPK) पर 3 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। इस फैसले की जानकारी शुक्रवार को सरकार ने दी।
प्राधिकरण की जांच में सामने आया कि आईआईटीपीके ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उनके टॉपर्स केवल संस्थान स्तर पर थे, राष्ट्रीय स्तर पर नहीं। इस तरह की अधूरी जानकारी के कारण संस्थान की सफलता दर को लेकर गलत धारणा उत्पन्न हुई। विज्ञापनों में उम्मीदवारों के नाम और तस्वीरों के साथ ‘1’ और ‘2’ अंक जोड़कर उन्हें “आईआईटी टॉपर” और “नीट टॉपर” के रूप में प्रचारित किया गया, जो वास्तविकता से मेल नहीं खाता था।
सरकारी बयान के मुताबिक, संस्थान ने यह भी दावा किया था कि “आईआईटीपीके ने पिछले 21 वर्षों में 1384 आईआईटी रैंक प्राप्त की हैं,” जिससे छात्रों और अभिभावकों में यह गलतफहमी हुई कि सभी उम्मीदवारों को आईआईटी में दाखिला मिला है।
इसके अतिरिक्त, संस्थान ने अपने विज्ञापनों में “वर्ष दर वर्ष सर्वोच्च सफलता दर,” “21 वर्षों में सर्वश्रेष्ठ सफलता अनुपात” और “सफलता दर 61%” जैसे दावे किए थे, लेकिन इन आंकड़ों का कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे छात्रों और अभिभावकों में भ्रम पैदा हुआ।
CCPA ने यह स्पष्ट किया कि आईआईटीपीके ने जानबूझकर महत्वपूर्ण जानकारी छुपाई, जो छात्रों को सही कोचिंग संस्थान या पाठ्यक्रम का चुनाव करने में मदद कर सकती थी। आयोग ने युवाओं को इस तरह के भ्रामक प्रचार से बचाने के लिए यह कदम उठाया है।
अब तक, CCPA ने 46 कोचिंग संस्थानों को अनुचित व्यापारिक गतिविधियों और भ्रामक विज्ञापनों के लिए नोटिस जारी किए हैं। इन 24 कोचिंग संस्थानों पर कुल 77.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है और उन्हें ऐसे भ्रामक विज्ञापनों को तुरंत बंद करने का आदेश दिया गया है।




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