
जलवायु परिवर्तन केवल एक शब्द भर नहीं है, बल्कि यह हमारी जीवनशैली और भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल रहा है। हमें जल के संरक्षण और सतत उपयोग की दिशा में जागरूक होने की आवश्यकता है। अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग और ऊर्जा संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को लेकर युवाओं को सही जानकारी होनी चाहिए। ये विचार दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज के भूगोल विभाग द्वारा आयोजित ‘जियोटाइम’ कार्यक्रम में वक्ताओं ने व्यक्त किए। उन्होंने छात्रों को जलवायु परिवर्तन, सौर ऊर्जा की चुनौतियों और जल संरक्षण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।
भूगोल विभाग और भूगोल संघ के तत्कालीन अध्यक्ष व्योम शर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस वार्षिक कार्यक्रम का मुख्य विषय था— “हरित संक्रमण और जलीय समता: विकसित भारत 2047″। इस कार्यक्रम का आयोजन जल शक्ति मंत्रालय, राष्ट्रीय जल मिशन, गैस प्राधिकरण इंडिया, राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान और हिमालयन सेंटर फॉर वूमेन एम्पावरमेंट, क्लाइमेट चेंज एंड जियोस्पेशियल एनालिटिक्स के सहयोग से किया गया।
विशेषज्ञों ने जलवायु संकट और नवीकरणीय ऊर्जा पर अपने विचार रखे। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की वैज्ञानिक संगीता कस्तुरे ने छात्रों से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों और समाधान पर चर्चा की। अन्य वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन के कारणों, उसके दुष्प्रभावों और जल संरक्षण के उपायों पर जानकारी दी। वक्ताओं ने सौर ऊर्जा क्षेत्र में आ रही चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की और भविष्य में इसके संभावित समाधान सुझाए।
कार्यक्रम के देर शाम सत्र में कई प्रमुख अतिथि उपस्थित रहे, जिनमें आईएफएस अधिकारी अभय कुमार, दुबई स्थित आरके ग्लोबल प्रमुख संदीप एस. राठौड़, वित्त मंत्रालय के अतिरिक्त कमिश्नर अर्जुन मीणा, विशिष्ट अतिथि हरमनप्रीत सिंह आदि शामिल हैं।
इस कार्यक्रम में छात्रों के लिए भूगोल से जुड़ी वाद-विवाद प्रतियोगिता और सेमिनार भी आयोजित किए गए, जिसमें उन्होंने जलवायु परिवर्तन, जल संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा से संबंधित विषयों पर अपनी अवधारणाएं और समाधान प्रस्तुत किए।
इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों को पर्यावरणीय चुनौतियों और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों पर महत्वपूर्ण मार्गदर्शन मिला। विशेषज्ञों ने जल संरक्षण की अनिवार्यता पर जोर दिया और सौर ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा के विस्तार की संभावनाओं पर चर्चा की। भविष्य के भारत के लिए स्थायी विकास और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना अनिवार्य है, और इस दिशा में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होगी।




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