
रेलवे मंत्रालय ने सभी विभागीय पदोन्नति परीक्षाओं को केंद्रीकृत कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) के माध्यम से आयोजित करने का निर्णय लिया है। यह फैसला तब आया जब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में पूर्व मध्य रेलवे के 26 अधिकारियों को एक विभागीय परीक्षा के पेपर लीक के आरोप में गिरफ्तार किया। छापेमारी के दौरान 1.17 करोड़ रुपये नकद भी बरामद किए गए।
पहले कैसे होती थीं परीक्षाएं?
अब तक, रेलवे में विभागीय पदोन्नति परीक्षाएं प्रत्येक रेलवे डिवीजन और ज़ोन द्वारा आंतरिक रूप से आयोजित की जाती थीं। लेकिन हाल के वर्षों में इन परीक्षाओं में भ्रष्टाचार और अनुचित तरीकों के उपयोग की शिकायतें बढ़ने लगी थीं। इसे देखते हुए रेलवे बोर्ड की एक उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि अब से सभी विभागीय प्रमोशन परीक्षाएं रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) द्वारा केंद्रीकृत कंप्यूटर-आधारित प्रणाली के तहत आयोजित की जाएंगी।
नई परीक्षा प्रक्रिया और नियम
रेल मंत्रालय के अनुसार, सभी ज़ोनल रेलवे अब परीक्षा के लिए एक वार्षिक कैलेंडर तैयार करेंगे और परीक्षाएं केवल इसी कैलेंडर के अनुसार आयोजित की जाएंगी।
रेलवे भर्ती बोर्ड को यह जिम्मेदारी उसके व्यापक अनुभव के आधार पर सौंपी गई है। वर्ष 2015 से अब तक 7.7 करोड़ से अधिक उम्मीदवार कंप्यूटर-आधारित परीक्षाओं में शामिल हो चुके हैं, जिनमें पेपर लीक, प्रतिरूपण (इम्परसनेशन), रिमोट लॉग-इन और जासूसी उपकरणों के इस्तेमाल जैसी समस्याओं को प्रभावी रूप से रोका गया है।
पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उपाय
रेलवे मंत्रालय ने परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण उपाय किए हैं:
परीक्षा केंद्रों का चयन: केंद्रों का चयन खुली निविदा (ओपन टेंडर) प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा, जिसमें गुणवत्ता और लागत आधारित चयन (Quality and Cost-Based Selection) जैसी शर्तें लागू होंगी।
सुरक्षा उपाय:
– परीक्षा केंद्रों का गहन ऑडिट किया जाएगा।
– परीक्षा से केवल चार दिन पहले ही परीक्षा केंद्रों की जानकारी दी जाएगी।
– सभी परीक्षा केंद्रों पर 100% सीसीटीवी कवरेज सुनिश्चित किया जाएगा।
– परीक्षा से दो घंटे पहले और परीक्षा समाप्त होने के एक घंटे बाद तक रिकॉर्डिंग की जाएगी।
– परीक्षार्थियों की तलाशी हैंड-हेल्ड मेटल डिटेक्टर से की जाएगी।
मानवीय हस्तक्षेप की रोकथाम: परीक्षा केंद्रों का आवंटन कंप्यूटर द्वारा रैंडम जेनरेशन के माध्यम से किया जाएगा, जिससे किसी भी प्रकार की धांधली को रोका जा सके।
रेलवे मंत्रालय का यह कदम विभागीय परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। इससे न केवल रेलवे कर्मचारियों को निष्पक्ष पदोन्नति मिलेगी, बल्कि विभागीय परीक्षा प्रणाली में सुधार भी होगा।




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