
इस वर्ष की QS विषय-वार रैंकिंग 2025 में भारत के 9 प्रमुख विश्वविद्यालयों और संस्थानों ने दुनिया के टॉप 50 में जगह बनाई है। हालांकि, इस बार IIT, IIM और JNU जैसे कई प्रतिष्ठित संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट देखी गई है। लंदन स्थित क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS) द्वारा जारी 15वीं वार्षिक विश्व विश्वविद्यालय रैंकिंग के अनुसार, भारत ने इस वर्ष 12 टॉप-50 रैंकिंग हासिल की हैं, जो नौ प्रमुख संस्थानों से आई हैं।
ISM धनबाद ने शीर्ष स्थान हासिल किया
इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स (ISM), धनबाद ने इंजीनियरिंग-खनिज और खनन श्रेणी में 20वां स्थान प्राप्त किया है, जिससे यह भारत का सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला संस्थान बन गया है। इसके अलावा IIT बॉम्बे और IIT खड़गपुर ने इस क्षेत्र में क्रमशः 28वें और 45वें स्थान पर जगह बनाई, हालांकि दोनों की रैंकिंग में गिरावट आई है।
IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे की रैंकिंग में सुधार
IIT दिल्ली और IIT बॉम्बे ने इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी में अपनी रैंकिंग में सुधार कर क्रमशः 26वां और 28वां स्थान प्राप्त किया है। इन दोनों संस्थानों ने इंजीनियरिंग-इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स में भी टॉप 50 में अपनी स्थिति मजबूत की है।
IIM अहमदाबाद और बैंगलोर की रैंकिंग गिरी
IIM अहमदाबाद की रैंकिंग 22 से 27 हो गई है। IIM बैंगलोर की रैंकिंग 32 से 40 पर पहुंच गई है। IIT मद्रास (पेट्रोलियम इंजीनियरिंग) और JNU (विकास अध्ययन) भी टॉप 50 में बने रहे, लेकिन उनकी रैंकिंग में भी गिरावट देखी गई है।
QS रैंकिंग में भारत की स्थिति
QS विषय-विशिष्ट रैंकिंग 2025 में भारत ने 533 बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जो पिछले साल की तुलना में 25.7% अधिक है। भारत ने चीन, अमेरिका, यूके और कोरिया के बाद पांचवीं सबसे ज्यादा नई प्रविष्टियां दर्ज की हैं और कुल प्रविष्टियों के मामले में 12वें स्थान पर है।
IIT मद्रास और VIT वेल्लोर ने डेटा साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। IISc बैंगलोर और IIT कानपुर ने इंजीनियरिंग-खनिज और खनन क्षेत्र में जगह बनाई है।
भारत की उच्च शिक्षा में सुधार की आवश्यकता
QS की सीईओ जेसिका टर्नर ने कहा कि भारत ने AI, ग्रीन और डिजिटल कौशल जैसे क्षेत्रों में असाधारण प्रदर्शन किया है, लेकिन स्थिरता और उद्यमशीलता क्षमताओं में अभी भी सुधार की जरूरत है। उन्होंने कहा, “उच्च शिक्षा सुधार और कौशल संरेखण के माध्यम से इन अंतरालों को भरना आवश्यक है, ताकि भारत के स्नातक वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धी बने रहें और भविष्य के उद्योगों का नेतृत्व करने के लिए तैयार हों।”




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