
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 25,000 से ज्यादा टीचिंग और नॉन-टीचिंग पदों पर की गई नियुक्तियों को रद्द किए जाने के बाद से पश्चिम बंगाल में नौकरी को लेकर बहस तेज हो गई थी। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) ने आज बयान जारी किया। WBSSC ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करेगा और 2016 की भर्ती प्रक्रिया में भाग लेने वाले सभी टीचिंग और नॉन-टीचिंग उम्मीदवारों के लिए जल्द ही नई परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
नई परीक्षा के लिए कानूनी सलाह लेगा WBSSC
सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य द्वारा संचालित और राज्य-सहायता प्राप्त स्कूलों में 25,752 शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द किए जाने के एक दिन बाद, WBSSC के अध्यक्ष सिद्धार्थ मजूमदार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आयोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत चयन प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए कानूनी सलाह लेगा। उन्होंने कहा, “हम नए उम्मीदवारों की पात्रता पर कानूनी सलाह लेंगे कि क्या वे नई परीक्षा में भाग ले सकते हैं या नहीं।”
2016 की भर्ती प्रक्रिया में 26 लाख उम्मीदवार थे शामिल
मजूमदार ने बताया कि 2016 में लगभग 26 लाख उम्मीदवारों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था, जिनमें से लगभग 22 लाख उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे। उनमें से 1.41 लाख उम्मीदवार कक्षा 9-10 के लिए थे, और 1.5 लाख उम्मीदवार कक्षा 11-12 के लिए भर्ती परीक्षा में बैठे थे। बाकी उम्मीदवार नॉन-टीचिंग पदों के लिए थे। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार हमें चयन प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है, लेकिन इस मामले में कानूनी स्पष्टीकरण की आवश्यकता है।
चयन प्रक्रिया में समय अधिक लगने की संभावना
WBSSC के अध्यक्ष ने यह भी कहा कि इतनी बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को ध्यान में रखते हुए, तीन महीने में चयन प्रक्रिया पूरी होने की संभावना नहीं है। उन्होंने कहा, “कोर्ट के आदेश में तीन महीने की समय सीमा का कोई जिक्र नहीं था। यह एक लंबी प्रक्रिया है, और हम इसे तीन माह के भीतर पूरा करने की उम्मीद नहीं करते हैं। हम जल्द से जल्द नई परीक्षा प्रक्रिया शुरू करेंगे।”
प्रभावित कर्मचारियों की संख्या और सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कक्षा 9 और 10 में काम कर रहे 12,905 टीचर्स और कक्षा 11 और 12 में काम कर रहे 5,712 टीचर्स की नौकरी चली गई है। इसके अलावा, 26,000 प्रभावित कर्मचारियों में से बाकी ग्रुप C और D कैटेगरी के नॉन-टीचिंग कर्मचारी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को निर्देश देते हुए कहा कि उसने नियुक्तियों में खामियों और अवैधताओं को जानबूझकर छुपाया और कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
आयोग की विफलता पर प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के सामने योग्य उम्मीदवारों से दागी उम्मीदवारों को अलग करने में आयोग की कथित विफलता के बारे में पूछे जाने पर, मजूमदार ने कहा, “हमने शपथ पत्र के रूप में वे आंकड़े पेश किए थे, लेकिन यह अलग बात है कि हम अपने आंकड़ों से कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर सके।”




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