
प्रसिद्ध उर्दू शायर और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के शिक्षक डॉ. मोइद रशीदी को प्रतिष्ठित भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार सम्मान 2025 के लिए चुना गया है। यह राष्ट्रीय सम्मान प्रतिवर्ष विभिन्न भारतीय भाषाओं के चार उभरते हुए लेखकों को प्रदान किया जाता है। डॉ. रशीदी को यह सम्मान उर्दू साहित्य में उनके योगदान के लिए दिया जा रहा है।
इस पुरस्कार में प्रशस्ति पत्र, शॉल और ₹51,000 की नकद राशि शामिल है। यह सम्मान 1 मई को कोलकाता में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया जाएगा, जिसमें साहित्य और संस्कृति क्षेत्र की प्रतिष्ठित हस्तियां उपस्थित रहेंगी। वर्ष 1975 में स्थापित, भारतीय भाषा परिषद का उद्देश्य साहित्यिक सृजन और भारतीय भाषाओं की विविधता को प्रोत्साहित करना है।
डॉ. रशीदी उर्दू साहित्य की एक प्रभावशाली आवाज़ बनकर उभरे हैं और उनकी कविताओं में नए विचारों की अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। इससे पहले, उन्हें वर्ष 2013 में साहित्य अकादमी, दिल्ली द्वारा युवा लेखकों के लिए सम्मानित किया जा चुका है। अब तक वे सात पुस्तकें लिख चुके हैं, जिनमें उल्लेखनीय काव्य संग्रह ‘आख़िरी किनारे पर’ (उर्दू) और ‘इश्क़’ (हिंदी) शामिल हैं, जो रेख्ता फ़ाउंडेशन द्वारा प्रकाशित की गई हैं। यह सम्मान भारतीय साहित्यिक जगत में उनके बढ़ते प्रभाव को रेखांकित करता है।




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