
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) अपने सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। आयोग 1 मई, 2025 से उपस्थिति के लिए फेस-आधारित आधार प्रमाणीकरण प्रणाली लागू करने वाला है। इस कदम का उद्देश्य उपस्थिति प्रक्रिया को अधिक सटीक, सुरक्षित और यूजर फ्रेंडली बनाना है।
यह प्रणाली पहले से ही राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के माध्यम से विभिन्न सरकारी कार्यालयों में सफलतापूर्वक लागू की जा चुकी है।
फिलहाल फिंगरप्रिंट आधारित प्रणाली हो रही है बंद
इस समय मेडिकल कॉलेजों में फिंगरप्रिंट आधारित AEBAS (Aadhaar Enabled Biometric Attendance System) का उपयोग हो रहा है, जिसे अब पूरी तरह से बंद किया जाएगा। इसकी जगह अब फेस आधारित प्रमाणीकरण से उपस्थिति दर्ज की जाएगी। यह उपस्थिति केवल मोबाइल ऐप या दीवार पर लगे विशेष उपकरणों के माध्यम से ही ली जा सकेगी।
कॉलेजों को साझा करने होंगे जीपीएस निर्देशांक
इस नई व्यवस्था के सुचारु क्रियान्वयन के लिए सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को अपने कैंपस में उन स्थानों के GPS निर्देशांक साझा करने होंगे जहाँ फैकल्टी मोबाइल ऐप के जरिए उपस्थिति दर्ज करेंगे। यह जानकारी कॉलेज के डीन या प्रिंसिपल के हस्ताक्षर और मुहर सहित 20 अप्रैल 2025 तक एनएमसी को भेजनी होगी।
ईमेल भेजने का पता है: support.aebas@nmc.org.in
ईमेल की विषय पंक्ति इस प्रकार होनी चाहिए:
“Face AEBAS <कॉलेज का पूरा नाम> <कॉलेज का शहर>”
साथ ही, कॉलेज के नोडल अधिकारी का संपर्क विवरण भी मेल में शामिल किया जाना अनिवार्य है।
एनएमसी के आधिकारिक नोटिस के अनुसार, उपस्थिति केवल उस स्थान के 100 मीटर के दायरे में ही दर्ज की जा सकेगी, जिसके जीपीएस निर्देशांक साझा किए गए हैं। इन निर्देशांकों को अनुलग्नक-I फॉर्मेट में भेजना होगा।
24 अप्रैल से एक्टिव होगा ऐप
एक बार कॉलेज द्वारा स्थान संबंधी जानकारी भेज दी जाती है, फैकल्टी मेंबर्स को अपने मोबाइल फोन में फेस आधारित आधार प्रमाणीकरण ऐप इंस्टॉल करना होगा। यह ऐप 24 अप्रैल 2025 से एक्टिव हो जाएगा और Android Play Store तथा Apple App Store दोनों पर उपलब्ध रहेगा।
यदि किसी कॉलेज को तकनीकी परेशानी होती है, तो उन्हें 30 अप्रैल 2025 से पहले NMC की तकनीकी टीम से संपर्क करना होगा।
1 मई से केवल फेस प्रमाणीकरण ही मान्य
1 मई 2025 से फिंगरप्रिंट आधारित उपस्थिति पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी और केवल फेस बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण से ही उपस्थिति दर्ज होगी।
सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के डीन/प्रिंसिपलों से यह अपेक्षा की गई है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके सभी फैकल्टी मेंबर्स के मोबाइल में यह ऐप सही तरीके से इंस्टॉल और एक्टिवेट किया गया हो।




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