
हर साल 21 अप्रैल को पूरे देश में सिविल सर्विसेज डे मनाया जाता है, जो प्रशासनिक सेवा में लगे अधिकारियों की भूमिका और योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। इस मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सभी सिविल सर्वेंट्स को शुभकामनाएं देते हुए उनके कार्यों की सराहना की।
“नीति निर्माण और जनसेवा में निभा रहे ऐतिहासिक भूमिका” – राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, “सिविल सर्वेंट्स को सिविल सर्विसेज डे की ढेर सारी शुभकामनाएं! सार्वजनिक सेवा में आपकी भूमिका, नीति निर्माण और कार्यान्वयन में आपके योगदान ने नागरिकों की भलाई और देश के विकास पर गहरा प्रभाव डाला है।”
उन्होंने आगे यह भी कहा कि सिविल सर्वेंट्स देश को उसके महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करें और सुशासन के नए मानक स्थापित करें।
सरदार पटेल की दृष्टि से प्रेरित यह दिन
सिविल सर्विसेज डे की शुरुआत 21 अप्रैल 1947 को हुई थी, जब भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने दिल्ली के मेटकाफ हाउस में सिविल सेवा अधिकारियों को संबोधित किया था। उसी ऐतिहासिक भाषण में उन्होंने सिविल सेवाओं को “भारत की स्टील फ्रेम” कहा था — एक ऐसी मज़बूत व्यवस्था, जो देश की स्थिरता और विकास का आधार बनेगी।
आईएएस अधिकारियों संघ ने भी जताई प्रतिबद्धता
इस अवसर पर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों के संघ ने भी सभी सिविल सर्वेंट्स को बधाई दी और सरदार पटेल की सोच को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। उन्होंने एक्स पर लिखा:
“आज हम सिविल सर्विसेज डे पर खुद को फिर से समर्पित करते हैं और सरदार पटेल के मजबूत, सेवा-उन्मुख राष्ट्र के दृष्टिकोण को अपनाने का संकल्प लेते हैं। हम देश की सेवा करने के लिए ईमानदारी, प्रतिबद्धता और गर्व के साथ काम करेंगे।”
राष्ट्र निर्माण में सिविल सेवाओं की अहम भूमिका
सिविल सर्विसेज डे सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि उन हजारों समर्पित अधिकारियों के काम का सम्मान और प्रेरणा का प्रतीक है जो पूरे देश में सुशासन, पारदर्शिता और विकास के लिए कार्यरत हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि नीतियों के निर्माण से लेकर उनके क्रियान्वयन तक, सिविल सर्वेंट्स राष्ट्र की रीढ़ की हड्डी हैं।




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