
उत्तर प्रदेश शिक्षा चयन आयोग (UPHESC), प्रयागराज द्वारा आयोजित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस घोटाले का खुलासा करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दो सगे भाई — बैजनाथ पाल और विनय कुमार पाल, और उनका सहयोगी महबूब अली शामिल हैं। इन तीनों को लखनऊ के विभूतिखंड स्थित पॉलिटेक्निक क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।
कैसे होता था फर्जीवाड़ा?
STF की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह अभ्यर्थियों को फर्जी प्रश्न पत्र देकर उनसे मोटी रकम वसूलता था। मुख्य आरोपी बैजनाथ पाल, गोंडा के लाल बहादुर शास्त्री डिग्री कॉलेज में राजनीति शास्त्र का सहायक प्रोफेसर है। उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई उम्मीदवारों को झांसे में लिया। महबूब अली इस गिरोह में फर्जी प्रश्न पत्र तैयार करने का कार्य करता था, जबकि विनय पाल, बैजनाथ का भाई, भी इस पूरे ठगी नेटवर्क में सक्रिय रूप से शामिल था।
12 लाख में हुई पेपर की डील
जांच के अनुसार, गिरोह ने कपिल और सुनील नामक दो अभ्यर्थियों से 12 लाख रुपये में फर्जी प्रश्न पत्र देने का सौदा किया। इस रकम में से 10 लाख रुपये बैजनाथ पाल को मिले, 1 लाख विनय पाल को और 1 लाख महबूब अली को दिया गया। STF अधिकारियों के मुताबिक, यह गिरोह एक परीक्षा के पेपर के लिए 35 लाख रुपये तक की डील करने में सक्षम था।
हजार से ज्यादा पदों के लिए हो रही है भर्ती
यह गिरफ्तारी 16 और 17 अप्रैल को आयोजित UPHESC असिस्टेंट प्रोफेसर की लिखित परीक्षा के दौरान हुई। आयोग इस बार 1,017 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चला रहा है, जिससे परीक्षा की निष्पक्षता बेहद अहम हो जाती है।
STF की अपील और अगली कार्रवाई
STF ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और परीक्षा में हेराफेरी से संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और अन्य संलिप्त व्यक्तियों की तलाश जारी है। पुलिस और STF ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे ऐसे ठग गिरोहों से सावधान रहें और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को पैसे न दें। परीक्षा प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाए रखने के लिए सभी उम्मीदवारों का सहयोग जरूरी है।




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