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लद्दाख में ‘3 इडियट्स’ फेम ड्रुक पद्मा करपो स्कूल को मिली सीबीएसई की मान्यता, 24 वर्षों का करना पड़ा इंतजार 

लेह के ठंडे रेगिस्तान में स्थित ड्रुक पद्मा करपो स्कूल, जिसे आमिर खान की फिल्म ‘3 इडियट्स’ (2009) के बाद प्रसिद्धि मिली थी, को आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से मान्यता प्राप्त हो गई है। इस ऐतिहासिक मान्यता के लिए स्कूल को लगभग 24 वर्षों का लंबा इंतजार करना पड़ा।
स्कूल का नाम महान विद्वान मिफाम पेमा कार्पो (1527-1592) के सम्मान में रखा गया है। स्थानीय बोथी भाषा में “पद्मा करपो” का अर्थ “सफेद कमल” होता है।

अब तक का सफर
अब तक ड्रुक पद्मा करपो स्कूल जम्मू और कश्मीर राज्य शिक्षा बोर्ड (JKBOSE) से संबद्ध था। हालांकि, सीबीएसई से मान्यता प्राप्त करने के प्रयास कई बार ‘नॉन-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ (NOC) की कमी के कारण अधूरे रह गए थे। अब सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और स्कूल के कक्षा 10 के छात्र सीबीएसई बोर्ड परीक्षा परिणाम का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

प्रधानाचार्या ने जताई खुशी
प्रधानाचार्या मिंगुर अंगमो ने बताया, “स्कूल के पास पहले से ही सभी जरूरी सुविधाएं और आधुनिक शिक्षण पद्धतियां मौजूद थीं, लेकिन एनओसी न मिलने के कारण प्रक्रिया अटकी रही। अब सीबीएसई की मान्यता से छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते और सहज हो गए हैं।”

सीबीएसई के मानदंड और स्कूल का समन्वय
सीबीएसई के अनुसार, किसी भी स्कूल को संबद्धता पाने के लिए संबंधित राज्य से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है। विदेशी स्कूलों के लिए यह प्रमाण पत्र संबंधित देश में भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से प्राप्त किया जाता है।
ड्रुक पद्मा करपो स्कूल की शिक्षण पद्धति पहले से ही पारंपरिक ‘रटंत शिक्षा’ से हटकर नवाचार और खेल आधारित शिक्षा पर केंद्रित थी, जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप है। अंगमो के अनुसार, सीबीएसई पाठ्यक्रम के साथ समन्वय करना अब सहज रहेगा।

भविष्य की योजनाएं
स्कूल 2028 तक कक्षा 11 और 12 की पढ़ाई भी शुरू करने की योजना बना रहा है। इसके लिए शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आरंभ कर दिए गए हैं ताकि छात्रों का उच्चतर शिक्षा में सुगम संक्रमण सुनिश्चित किया जा सके।

‘3 इडियट्स’ फिल्म से मिली पहचान
‘3 इडियट्स’ फिल्म में एक छात्र को इलेक्ट्रिक शॉक लगने वाला दृश्य इसी स्कूल में फिल्माया गया था, जिसने इसे एक अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। वह ‘आइकोनिक वॉल’ अब स्कूल परिसर के भीड़भाड़ से दूर एक अलग स्थान पर स्थानांतरित कर दी गई है, ताकि छात्रों की पढ़ाई में कोई बाधा न आए।

पर्यटन स्थल के रूप में उभरता स्कूल
आज यह स्कूल एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन चुका है। पर्यटक न केवल स्कूल परिसर का दौरा करते हैं, बल्कि कभी-कभी शैक्षिक गतिविधियों में भी भाग लेते हैं। हाल ही में आयोजित मॉक चुनाव गतिविधि में पर्यटकों ने भी भागीदारी की, जिससे छात्रों को नया अनुभव और समाज में जागरूकता फैलाने का अवसर मिला।

 

Asmita Sarkar

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