
इस साल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में कुल 1009 उम्मीदवारों ने सफलता हासिल की है। टॉप रैंक हासिल कर प्रयागराज की रहने वाली शक्ति दुबे ने देशभर में चर्चा बटोरी है। शक्ति दुबे को ऑल इंडिया रैंक 1 प्राप्त हुई है, लेकिन उनकी इस सफलता पर अब सवाल उठने लगे हैं। देश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी रहे यशोवर्धन झा आजाद ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में शक्ति दुबे के टॉप करने पर सवाल खड़े किए हैं।
कौन हैं शक्ति दुबे?
शक्ति दुबे उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के नैनी क्षेत्र की निवासी हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई प्रयागराज में हुई और इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद शक्ति ने बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से मास्टर्स की डिग्री प्राप्त की। अपनी मास्टर्स की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। 2018 के आसपास से तैयारी कर रही शक्ति ने इस बार परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 1 हासिल की, जो कि एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने 9 लाख से ज्यादा परीक्षार्थियों को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया है।
यूपीएससी अटेम्प्ट को लेकर उठा विवाद
शक्ति दुबे की इस सफलता पर देश के पूर्व आईपीएस और केंद्रीय सूचना आयुक्त यशोवर्धन झा आजाद ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट में उन्हें बधाई देने के साथ यह सुझाव दिया कि किसी भी उम्मीदवार को 25 वर्ष की आयु से पहले केवल दो प्रयास ही दिए जाने चाहिए। हालांकि, उन्होंने अपने पोस्ट में शक्ति की जगह साक्षी दुबे लिखा है, जो संभवतः एक त्रुटि है।
इस टिप्पणी के पीछे यह तर्क दिया जा रहा है कि शक्ति दुबे ने पांच प्रयासों के बाद सफलता पाई है, और यह संख्या कुछ विशेषज्ञों को ज़्यादा लग रही है। झा आजाद का यह प्रस्ताव सोशल मीडिया पर काफी चर्चित हो गया है और इस पर लोग अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।
गौरतलब है कि यशोवर्धन झा आजाद 1976 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और अपने लंबे करियर में वे कई अहम पदों पर तैनात रह चुके हैं, जिनमें इंटेलिजेंस ब्यूरो जैसी प्रतिष्ठित एजेंसी भी शामिल है।
जहां एक ओर शक्ति दुबे की मेहनत और सफलता की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर उनके प्रयासों की संख्या को लेकर एक नई बहस भी शुरू हो गई है। यह मामला अब केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि सिविल सेवा परीक्षा प्रणाली को लेकर व्यापक विमर्श का कारण बन गया है।




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