
यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (UDF) ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक रिट याचिका दायर की है जिसमें NEET PG 2025 परीक्षा को दो अलग-अलग शिफ्टों में कराने के राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (NBE) के निर्णय को चुनौती दी गई है। यह याचिका UDF के अध्यक्ष डॉ. लक्ष्य मित्तल की ओर से अधिवक्ता सत्याम सिंह राजपूत के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल की गई है। याचिका में आग्रह किया गया है कि देशभर में यह परीक्षा एक ही समान सत्र में आयोजित की जाए, ताकि सभी अभ्यर्थियों को निष्पक्ष अवसर मिल सके।
UDF की ओर से अधिवक्ता सत्याम सिंह राजपूत ने दलील दी कि NEET PG को दो शिफ्टों में अलग-अलग प्रश्नपत्रों के साथ आयोजित करने से कठिनाई स्तर में फर्क आ जाता है, जिससे अभ्यर्थियों के मूल्यांकन में असमानता उत्पन्न होती है। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) का उल्लंघन बताया।
डॉ. लक्ष्य मित्तल ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से कहा कि उनका संगठन हजारों मेडिकल प्रोफेशनल्स और NEET PG अभ्यर्थियों का प्रतिनिधित्व करता है जो NBE द्वारा अपनाई गई ‘नॉर्मलाइज़ेशन प्रक्रिया’ से असहमत हैं। उन्होंने इसे मनमानी और अपारदर्शी बताया, जो कि एक कंटेंट-हेवी, मेमोरी-बेस्ड परीक्षा जैसे NEET PG के लिए उपयुक्त नहीं है। यह प्रक्रिया AIIMS दिल्ली की प्रणाली से ली गई है, लेकिन वहां की परीक्षा प्रकृति भिन्न होती है।
याचिका में कई मुख्य मुद्दे उठाए गए हैं—जैसे कि अलग-अलग शिफ्टों के कारण असमानता, नॉर्मलाइज़ेशन की त्रुटिपूर्ण पद्धति, 2024 में हुई विसंगतियाँ, सांख्यिकीय भ्रांतियाँ, और पारदर्शिता की कमी। याचिका में कहा गया कि अभ्यर्थियों को न तो रॉ स्कोर, न ही शिफ्ट-वार कठिनाई का डेटा दिया जाता है, जिससे वे अपने मूल्यांकन की निष्पक्षता को परख नहीं पाते।
UDF द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर कराए गए एक सर्वे में 96% अभ्यर्थियों ने परीक्षा को एक ही शिफ्ट में कराने का समर्थन किया। अधिवक्ता राजपूत ने कहा कि परास्नातक चिकित्सा शिक्षा का अधिकार, जीवन और गरिमा के अधिकार का हिस्सा है, और चयन प्रक्रिया में असंगत व अप्रमाणित विधियों का उपयोग योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है।
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से यह निर्देश मांगा गया है कि NEET PG 2025 को एक समान सत्र में कराया जाए और जब तक अंतिम निर्णय न आ जाए, तब तक 15 जून 2025 को प्रस्तावित परीक्षा पर अंतरिम रोक लगाई जाए।




Add comment