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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पांच नए IITs के विस्तार को दी मंजूरी, परियोजना से शिक्षा और नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठाते हुए आंध्र प्रदेश (IIT तिरुपति), केरल (IIT पलक्कड़), छत्तीसगढ़ (IIT भिलाई), जम्मू और कश्मीर (IIT जम्मू) और कर्नाटक (IIT धारवाड़) में स्थापित पांच नए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) के शैक्षणिक और बुनियादी ढांचे के विस्तार को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया।

परियोजना का दायरा और वित्तीय विवरण:
यह फेज-B निर्माण योजना वर्ष 2025-26 से 2028-29 तक चार वर्षों की अवधि में लागू की जाएगी। इस पर कुल ₹11,828.79 करोड़ की अनुमानित लागत आएगी। इस बजट से न केवल शैक्षणिक भवनों, प्रयोगशालाओं और होस्टल की सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा, बल्कि अत्याधुनिक अनुसंधान और नवाचार ढांचे को भी विकसित किया जाएगा।

संकाय विस्तार और मानव संसाधन विकास:
शैक्षणिक गुणवत्ता को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 130 नए संकाय पद (Level-14 और उससे ऊपर के प्रोफेसर स्तर पर) सृजित किए जाएंगे। इससे उच्च गुणवत्ता वाले शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी, जो अनुसंधान, शिक्षण और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक होंगे।

अनुसंधान पार्क और उद्योग-संस्थान सहयोग:
प्रत्येक IIT में उन्नत अनुसंधान पार्क (Advanced Research Parks) स्थापित किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य cutting-edge तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना है। यह पार्क देश-विदेश की अग्रणी कंपनियों, स्टार्टअप्स और IITs के शोधकर्ताओं के बीच सहयोग को सशक्त बनाएंगे। Stanford Research Park और MIT Innovation District जैसे वैश्विक मॉडलों से प्रेरित ये पार्क भारत में “Make in India” और “Startup India” जैसी पहलों को मजबूती देंगे।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप कदम:
यह विस्तार राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विजन के अनुरूप है, जो उच्च शिक्षा संस्थानों को बहु-विषयक, अनुसंधान उन्मुख और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने की दिशा में केंद्रित है। यह निर्णय न केवल इंजीनियरिंग शिक्षा को मजबूत करेगा, बल्कि विज्ञान, डिजाइन, प्रबंधन और उद्यमिता जैसे विविध क्षेत्रों में भी नए अवसरों के द्वार खोलेगा।

क्षेत्रीय विकास को मिलेगा प्रोत्साहन:
ये पांच IITs देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में स्थित हैं, और इनके विस्तार से संतुलित क्षेत्रीय विकास, स्थानीय प्रतिभाओं का सशक्तिकरण और स्किल-बेस्ड रोजगार के अवसरों में वृद्धि होगी। विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर और छत्तीसगढ़ जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में यह निवेश शिक्षा और सामाजिक समावेशन के लिए एक बड़ी पहल मानी जा रही है।

 

Asmita Sarkar

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