
सुप्रीम कोर्ट ने नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्रस्तावित त्रि-भाषा फॉर्मूले को तमिलनाडु, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग करने वाली जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।
इस त्रि-भाषा फॉर्मूले का उद्देश्य देश में भाषाई विविधता को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत छात्रों को तीन भाषाएं सीखनी होंगी, जिनमें से कम से कम दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। यह प्रावधान सरकारी और निजी दोनों प्रकार के स्कूलों पर लागू होता है, लेकिन राज्यों को यह स्वतंत्रता दी गई है कि वे स्थानीय आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं के आधार पर भाषाओं का चयन करें, केंद्र की ओर से किसी तरह का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
नीति के तहत छात्रों को कम से कम कक्षा 5 तक अपनी मातृभाषा, घरेलू, स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जाना चाहिए, और यदि संभव हो तो यह व्यवस्था कक्षा 8 या उससे आगे तक भी जारी रखी जा सकती है। इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि प्रारंभिक शिक्षा मातृभाषा में मिलने से बच्चों की बौद्धिक समझ और सीखने की क्षमता बेहतर विकसित हो सके।




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