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कक्षा 10 में रोबोटिक्स शिक्षा अनिवार्य करने वाला देश का पहला राज्य बना केरल 

केरल ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 2 जून से शुरू हो रहे शैक्षणिक सत्र से कक्षा 10 के सभी 4.3 लाख छात्रों के लिए रोबोटिक्स शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। यह पहल राज्य को ऐसा करने वाला भारत का पहला राज्य बनाती है। रविवार को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया गया कि कक्षा 10 की आईसीटी (ICT) पाठ्यपुस्तक में “रोबोट्स की दुनिया” नामक अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें छात्रों को रोबोटिक्स की बुनियादी जानकारी मजेदार गतिविधियों के माध्यम से दी जाएगी।

रोबोटिक्स और एआई के जरिए छात्रों को मिल रहा है व्यावहारिक ज्ञान
केआईटीई के सीईओ और आईसीटी पाठ्यपुस्तक समिति के अध्यक्ष के. अनवर सदाथ ने अपने बयान में कहा कि पाठ्यक्रम में सर्किट निर्माण, सेंसर और एक्चुएटर्स का उपयोग, तथा कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के ज़रिए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित करना शामिल है।

आईसीटी किताब में दी गई पहली व्यावहारिक गतिविधि में छात्र एक रोबोट किट की मदद से ऐसा सैनिटाइज़र डिस्पेंसर बनाना सीखेंगे, जो हाथ के पास आते ही स्वचालित रूप से काम करने लगे। इसके लिए उन्हें Arduino ब्रेडबोर्ड, IR सेंसर, सर्वो मोटर और जम्पर तार जैसे उपकरणों का उपयोग करना होगा। इसके बाद छात्र एक स्मार्ट होम ऑटोमेशन सिस्टम बनाना सीखेंगे, जिसमें चेहरा पहचानने वाला स्मार्ट दरवाज़ा शामिल होगा। इस कार्य में PictoBlox सॉफ्टवेयर और उसके ‘फेस डिटेक्शन’ टूल की सहायता ली जाएगी। छात्र वेबकैम और Arduino किट के ज़रिए दरवाज़ा खोलने का सिस्टम प्रोग्राम करेंगे।

KITE का यह रोबोटिक्स पाठ्यक्रम छात्रों को नई तकनीकों के ज़रिए वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

शिक्षकों को मिल रही विशेष प्रशिक्षण सुविधा
KITE ने पहले ही 9,924 शिक्षकों के लिए कक्षा 10 की नई आईसीटी पाठ्यपुस्तक पर प्रशिक्षण का पहला चरण आयोजित कर लिया है। अनवर सदाथ ने कहा कि शिक्षकों के लिए समर्पित रोबोटिक्स प्रशिक्षण जुलाई में आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा, KITE अतिरिक्त रोबोटिक किटों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा और राज्य पाठ्यक्रम का पालन करने वाले गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को भी आवश्यकतानुसार सहायता प्रदान करेगा।

आईसीटी पाठ्यपुस्तक मलयालम, अंग्रेज़ी, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में सभी छात्रों के लिए उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि भाषा की बाधा छात्रों के तकनीकी विकास में आड़े न आए।

 

Asmita Sarkar

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