Edinbox Hindi

जेएनयू में सेंटर का नाम बदलकर ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ अमेरिका’ किया गया, प्रोफेसरों ने जताई आपत्ति

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अब अमेरिका का प्रभाव और अधिक स्पष्ट होता दिख रहा है। यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज़ (SIS) के सेंटर फॉर कैनेडियन, यूएस एंड लैटिन अमेरिकन स्टडीज़ का नाम बदलकर अब सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ अमेरिका कर दिया गया है।

पिछले महीने हुई कार्यकारी परिषद की बैठक में इस नाम परिवर्तन को मंजूरी दी गई थी, और हाल ही में जेएनयू प्रशासन ने इस पर अधिसूचना भी जारी कर दी है।

हालांकि, विश्वविद्यालय के कई प्रोफेसरों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि यह बदलाव केवल एक नाम का नहीं, बल्कि अध्ययन और शोध की दिशा को सीमित करने का संकेत भी है। शिक्षकों का कहना है कि कनाडा और लैटिन अमेरिका की विशिष्ट राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान है, जो अमेरिका से भिन्न है। ऐसे में इन क्षेत्रों को एक छत्र “अमेरिका” की पहचान में समेट देना चिंताजनक है।

कुछ शिक्षकों ने यह भी आशंका जताई है कि कहीं यह बदलाव वैश्विक राजनीतिक दबाव या प्रभाव का परिणाम तो नहीं है। मार्च माह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा को “51वां राज्य” कहे जाने की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यह सोच अकादमिक संस्थानों तक भी पहुंच गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के कदम अमेरिका के वैश्विक प्रभुत्व को स्वीकारने जैसे हैं, जो अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के विविध दृष्टिकोणों को सीमित कर सकते हैं। इससे न केवल अध्ययन का दायरा घटेगा, बल्कि कनाडा और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों पर शोध कार्य भी प्रभावित हो सकता है।

हालांकि, जेएनयू के SIS विभाग के एक अधिकारी का कहना है कि बदलाव केवल नाम तक ही सीमित है। “शोध क्षेत्र और फंडिंग पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा,” उन्होंने स्पष्ट किया।

फिर भी, शिक्षकों और शोधकर्ताओं के बीच यह बहस जारी है कि क्या यह बदलाव केवल प्रतीकात्मक है या इसके पीछे कोई गहरी रणनीतिक सोच काम कर रही है।

 

Asmita Sarkar

Add comment

Recent posts

Most popular

Most discussed