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दून यूनिवर्सिटी में ‘हिंदू अध्ययन केंद्र’ की स्थापना, युवाओं को सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की पहल 

दून यूनिवर्सिटी ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 से ‘हिंदू अध्ययन केंद्र’ (Centre for Hindu Studies) शुरू करने का निर्णय लिया है। इस पहल को छात्रों और शिक्षाविदों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है और इसे युवाओं को उनकी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

छात्रों की प्रतिक्रिया
छात्रा अंजलि सुयाल ने कहा, “भगवद गीता को आज भी अलग-अलग नजरिए से देखा जाता है। अगर यहां हिंदू अध्ययन विभाग खुलेगा, तो छात्र इसे गहराई से और व्यवस्थित रूप से समझ पाएंगे।”
एक अन्य छात्रा अनुष्का ने कहा, “मेडिटेशन और काउंसलिंग जैसी विधाएं हमारी संस्कृति की देन हैं, जिन्हें अब पश्चिम भी अपना रहा है। ऐसे कोर्स युवाओं को उनकी सांस्कृतिक पहचान से जोड़ सकते हैं।”

कोर्स की विशेषताएं और उद्देश्य
कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने बताया कि इस केंद्र में वेद, उपनिषद, पुराण और भारतीय दर्शन जैसे विषयों को मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच के साथ पढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों को समग्र और गहन ज्ञान प्राप्त हो सके।
2025-26 सत्र से एमए हिंदू अध्ययन कोर्स शुरू किया जाएगा, जिसमें पहले चरण में 20 सीटें निर्धारित हैं। उन्होंने यह भी कहा, “भारतीय ज्ञान परंपरा को समझने के लिए अब प्रशिक्षित शिक्षकों की आवश्यकता है जो इन विषयों में दक्ष हों।”

प्रवेश प्रक्रिया और प्रमुख तिथियां
प्रवेश परीक्षा: 22 जून 2025
आवेदन की अंतिम तिथि: 31 मई 2025
सीटें: 20 (प्रारंभिक चरण)
कोर्स आरंभ: जुलाई 2025

पाठ्यक्रम निर्माण और विशेषज्ञ समिति
चार सदस्यों वाली एक विशेषज्ञ समिति पाठ्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए 3 जून को विश्वविद्यालय का दौरा करेगी। विभागाध्यक्ष प्रो. एच.सी. पुरोहित ने कहा, “यह विभाग भारतीय सांस्कृतिक धरोहर के उन पक्षों पर केंद्रित होगा जिन्हें अब तक शिक्षा में पर्याप्त स्थान नहीं मिला।”

राष्ट्रीय और वैश्विक महत्व
मनोविज्ञान विभाग के प्रो. राजेश भट्ट ने कहा कि भारत में हिंदू अध्ययन के केंद्र बेहद सीमित हैं। “यह पहल शोध को नई दिशा देगी और कल्पना तथा तथ्य के बीच अंतर को समझने में मदद करेगी।”
कुलपति डंगवाल ने बताया कि यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज़ में हिंदू अध्ययन पढ़ाया जा रहा है, जो इसकी वैश्विक प्रासंगिकता को दर्शाता है। उन्होंने कहा, “जिस प्रकार भारत में इस्लामिक स्टडीज़ जैसे विभाग हैं, उसी तरह हिंदू स्टडीज़ की स्थापना भी एक संतुलित और आवश्यक कदम है।”

मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस पहल को “ऐतिहासिक” करार देते हुए कहा, “देवभूमि उत्तराखंड में इस कोर्स की शुरुआत से आम लोगों को सनातन परंपरा को समझने का अवसर मिलेगा।”

Asmita Sarkar

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