
आईआईटी, एनआईटी, आईआईआईटी और आईआईएससी बेंगलुरु सहित कुल 128 तकनीकी संस्थानों में दाखिला लेने वाले छात्रों के लिए राहतभरी खबर है। संयुक्त सीट आवंटन प्राधिकरण (JoSAA) ने जोसा काउंसलिंग 2025 के लिए सीट स्वीकृति शुल्क (Seat Acceptance Fee) में कटौती करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के अनुसार, सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए यह शुल्क अब ₹5,000 और आरक्षित वर्ग (SC, ST, PwD आदि) के लिए ₹2,500 घटा दिया गया है। अब सीट कन्फर्म होने पर सामान्य वर्ग को कुल ₹30,000 और आरक्षित वर्ग के छात्रों को ₹15,000 जमा करने होंगे। इसमें ₹5,000 की जोसा प्रोसेसिंग फीस भी शामिल है, जो काउंसलिंग में भाग लेने के लिए आवश्यक होती है।
जोसा की यह फीस पहले राउंड से अंतिम राउंड तक सीट आवंटन की पुष्टि के बाद संबंधित संस्थान में अनिवार्य रूप से जमा करनी होती है। यदि कोई छात्र समय पर यह शुल्क नहीं भरता, तो उसकी आवंटित सीट रद्द कर दी जाती है।
एक छात्र के अनुभव से मिली प्रेरणा
फीस कटौती का यह फैसला एक महत्वपूर्ण मामले के बाद सामने आया है। आगरा के एक मेधावी छात्र, जिसे आईआईटी बॉम्बे में सीट अलॉट हुई थी, आर्थिक तंगी के कारण सीट स्वीकृति शुल्क जमा नहीं कर सका। इसके चलते उसकी सीट रद्द कर दी गई। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां न्यायालय ने छात्र की परिस्थिति को देखते हुए आईआईटी बॉम्बे को उसके लिए विशेष सीट की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। इस घटना ने नीति निर्माताओं को मौजूदा प्रणाली की समीक्षा के लिए प्रेरित किया।
सात नए संस्थान जुड़े
जोशा काउंसलिंग में सात नए संस्थान जुड़े हैं। इस प्रकार अब 128 संस्थान हो गए हैं। इसमें नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रानिक्स एंड इंफॉरमेशन टेक्नोलॉजी (एनआईईएफटी), गोरखपुर, एनआईईएफटी राजस्थान, पटना, रोपड़, राजीव गांधी नेशनल एविएशन यूनिवर्सिटी अमेठी, इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी जम्मू-कश्मीर, जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस इंदौर शामिल हैं।
फीस पहले से जमा करने की सुविधा
छात्र अब काउंसलिंग राउंड शुरू होने से पहले ही पंजीकरण के साथ-साथ सीट स्वीकृति शुल्क और प्रोसेसिंग फीस एडवांस में जमा कर सकते हैं। यह सुविधा इसलिए दी जा रही है ताकि छात्र सीट मिलने के बाद फीस जमा करना भूलने की स्थिति में सीट रद्द न हो। जमा की गई राशि अंततः संस्थान में दाखिले के समय ट्यूशन फीस में समाहित कर दी जाती है।
फीस का भुगतान डेबिट/क्रेडिट कार्ड, यूपीआई, नेट बैंकिंग, ई-चालान या कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से किया जा सकता है।
यह निर्णय छात्रों की आर्थिक परेशानियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया एक सकारात्मक और स्वागतयोग्य कदम माना जा रहा है, जो प्रतिभाशाली लेकिन संसाधनविहीन छात्रों को देश के शीर्ष तकनीकी संस्थानों तक पहुंच बनाने में मदद करेगा।




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