
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध भारती कॉलेज में संस्कृत के उच्च कोटि के विद्वान प्रोफेसर अजीत राणा को शिक्षा व समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए ऑनरेरी डॉक्टरेट की उपाधि व इंटरनेशनल कर्मशील अवॉर्ड – 2025 तथा अंगवस्त्र व शील्ड देकर सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान सोक्रेट सोशल रिसर्च यूनिवर्सिटी द्वारा इंडिया इंटरनेशनल हेबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में मुख्य अतिथि पूर्व मेजर जनरल पी.के. सहगल ( रक्षा विशेषज्ञ ) प्रोफेसर शक्ति सिंह ( जेएनयू ) व केंद्रीय जांच ब्यूरो के पूर्व अधीक्षक श्री दिनेश शर्मा ने प्रदान किया। बता दें कि दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रो. अजीत राणा संस्कृत अध्यापन के क्षेत्र में एक महत्त्वपूर्ण नाम है और पिछले दो दशकों से भारतीय दर्शन, योग दर्शन, उपनिषद साहित्य, श्रीमद्भागवत गीता का अध्ययन व अध्यापन कार्य कर रहे हैं। वर्तमान में ये भारती कॉलेज में वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत्त हैं। प्रो. राणा को इंटरनेशनल कर्मशील अवॉर्ड मिलने पर कॉलेज की प्रिंसिपल, कॉलेज के शिक्षकों, साथियों व उनकी छात्राओं द्वारा बधाई व शुभकामनाएं दी जा रही हैं।
यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. के. योगेश ने बताया कि प्रोफेसर राणा का जन्म हरियाणा के हिसार जिला के सिसाय गाँव में एक किसान परिवार में हुआ था। परिवार आर्य समाज से प्रभावित था। पिता की इच्छा थी कि उनका पुत्र भारतीय ज्ञान परंपरा व भारतीय संस्कृति को जाने, इसलिए इन्हें संस्कृत पढ़ने के लिए झज्जर गुरुकुल में प्रवेश दिलाया गया। गुरुकुलीय शिक्षा ग्रहण करने के पश्चात बी.ए. ऑनर्स संस्कृत, महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय रोहतक से की। इसके पश्चात स्नातकोत्तर संस्कृत हंसराज कॉलेज से किया। इन्हें कई भाषाओं का भी ज्ञान है, यूजीसी नेट उत्तीर्ण करने पर दिल्ली विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग से रघुवंश तथा जानकीहरण में अपाणिनीय प्रयोग विषय पर पीएचडी की। इन्हें बहुत से पुरस्कार मिल चुके हैं तथा कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं तथा दर्जनों शोध आलेख पुस्तकों में छपे हैं। बहुत सी कार्यशाला आयोजित की जिसमें पत्र वाचन किया। ये पिछले दो दशकों से दिल्ली विश्वविद्यालय के विभिन्न कॉलेजों में अध्यापन कार्य कर चुके हैं, वर्तमान में भारती कॉलेज के संस्कृत विभाग में वरिष्ठ सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत्त हैं।
प्रो. अजीत राणा को इंटरनेशनल कर्मशील अवॉर्ड –2025 मिलने पर अपने संबोधन में कहा कि आज का समय प्रतियोगिता का है, हर व्यक्ति में एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ लगी हुई है। समाज के हर व्यक्ति को मुख्यधारा में लाकर ही इस समाज का सर्वांगीण विकास किया जा सकता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए वर्तमान सरकार ने सभी समुदायों को अवसर प्रदान किए हैं। भारतीय समाज स्वामी दयानंद सरस्वती, महात्मा हंसराज, डॉ. अम्बेडकर, सरदार भगतसिंह व महात्मा बुद्ध के विचारों पर चलते हुए ही आगे बढ़ सकता है। सन 2014 के बाद लोगों की स्थिति में आर्थिक और शैक्षणिक रूप से सुधार हुआ है। राजनैतिक रूप से इनमें सक्रियता भी बढ़ी है और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ी है। उन्होंने बताया कि अब स्थितियाँ काफी बदल गई हैं। वंचितों के प्रति लोगों के दृष्टिकोण तथा व्यवहार में परिवर्तन आया है। जैसे- जैसे शिक्षा व जागरूकता बढ़ेगी लोग अपने अधिकारों के प्रति सजग होंगे और जो पढ़ेगा वही आगे बढ़ेगा।




Add comment