
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के छात्रों के लिए चलाई जा रही पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना (Post-Matric Scholarship Scheme) को समाप्त करने की कोई योजना नहीं है।
लोकसभा में एक लिखित जवाब में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य SC-ST छात्रों के सकल नामांकन अनुपात (GER) को बढ़ावा देना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार के पास फिलहाल इस योजना को बंद करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
योजना की अवधि और वित्तीय व्यवस्था
यह योजना 2021-22 से 2025-26 तक केंद्र और राज्य सरकारों की साझेदारी में चल रही है, जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल और व्यय वित्त समिति ने स्वीकृति दी है।
SC छात्रों के लिए:
वित्तीय हिस्सेदारी: केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 का अनुपात।
– पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह अनुपात 90:10 है।
– केंद्र सरकार की राशि छात्रों के आधार लिंक्ड बैंक खातों में NSP पोर्टल के माध्यम से तब ट्रांसफर होती है, जब राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी जारी कर चुकी हो।
ST छात्रों के लिए:
वित्तीय हिस्सेदारी: 75:25 का अनुपात।
– केंद्र सरकार 75% राशि देती है, जबकि शेष 25% राज्य/केंद्रशासित प्रदेश द्वारा मिलाया जाता है।
– पूरी राशि एक साथ DBT के जरिए छात्रों के खाते में भेजी जाती है।
योजना जारी रहने की पुष्टि
सरकार की यह घोषणा उन अटकलों को खारिज करती है, जिनमें कहा जा रहा था कि यह योजना 2025-26 के बाद बंद की जा सकती है। वर्तमान में योजना पूरी तरह प्रभावी है और वंचित वर्ग के छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में सहायता प्रदान कर रही है।




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