
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने हाल ही में कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक का पहला भाग जारी किया है। किताब में “क्षेत्रीय प्रतिरोध आंदोलनों” से जुड़ी सामग्री न होने को लेकर उठे सवालों पर अब एनसीईआरटी ने सफाई दी है।
एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि यह पुस्तक दो भागों में प्रकाशित हो रही है और दूसरा भाग फिलहाल तैयार किया जा रहा है, जिसे सितंबर–अक्टूबर 2025 तक जारी किए जाने की संभावना है।
जो विषय छूटे, वे दूसरे भाग में आएंगे
एनसीईआरटी ने जानकारी दी कि जल्द ही आने वाली दूसरी पुस्तक “समाज की खोज: भारत और उससे आगे” – भाग 2 में वे सभी विषय शामिल होंगे, जो पहले भाग में नहीं आ पाए। इसमें विशेष रूप से क्षेत्रीय प्रतिरोध आंदोलनों और सशस्त्र विद्रोह जैसे विषय होंगे।
दूसरे भाग में शामिल किए जाने वाले प्रमुख विषय:
– पाइका विद्रोह (ओडिशा)
– खुर्दा विद्रोह
– कूका आंदोलन (पंजाब)
– सिखों के विद्रोह सहित अन्य क्षेत्रीय प्रतिरोध
एनसीईआरटी ने कहा कि दूसरा खंड विकास के अंतिम चरण में है, और इसे तय समय पर प्रकाशित करने की दिशा में काम चल रहा है।
पहले भाग में क्या है खास?
पहला भाग मुगलों, मराठों और औपनिवेशिक काल से संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं और शासन पर केंद्रित है। इसमें अकबर के शासन को ‘क्रूरता और सहिष्णुता’ का मिश्रण, बाबर को ‘क्रूर विजेता’ और औरंगज़ेब को ‘सैन्य शासक’ बताया गया है, जिसने गैर-मुसलमानों पर जजिया कर फिर से लागू किया था। इस खंड में दिल्ली सल्तनत, मुगलों, मराठों और ब्रिटिश काल की राजनीतिक-सामाजिक संरचनाओं पर भी प्रकाश डाला गया है।
कक्षा 7 से कक्षा 8 में विषयों का स्थानांतरण
पहले ये कुछ विषय कक्षा 7 की किताबों में होते थे, लेकिन अब इन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के अनुसार कक्षा 8 में समाहित किया गया है।




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