
दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2025–26 की शुरुआत से पहले रैगिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्देशानुसार, कॉलेज को रैगिंग मुक्त बनाने के लिए एक रैगिंग विरोधी समिति का गठन किया गया है।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी ने यूजीसी की गाइडलाइंस के तहत यह सुनिश्चित किया है कि किसी भी छात्र-छात्रा के साथ कोई अप्रिय घटना न हो। कॉलेज 1 अगस्त से खुलने जा रहा है और उसी दिन से यह समिति सक्रिय रूप से कार्य करेगी।
गठित रैगिंग विरोधी समिति में शामिल हैं:
डॉ. हंसराज सुमन, डॉ. रौनक, डॉ. अनिल मावी, डॉ. दिव्येंदु झा, डॉ. प्रतिभा, डॉ. पंकजेन्द्र किशोर, डॉ. ऋषि और डॉ. शेखर शशांक। समिति में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र प्रतिनिधि शामिल हैं।
कॉलेज प्रशासन के प्रयास:
– रैगिंग विरोधी दस्ते का गठन
– रैगिंग संबंधित पोस्टर और साहित्य का प्रचार
– परिसर में जागरूकता फैलाने के लिए नुक्कड़ नाटक, कहानी व अन्य रचनात्मक माध्यम
– छात्रों के लिए सेमिनार व वर्कशॉप
– डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जागरूकता अभियान
– यूजीसी द्वारा अपलोड रैगिंग विरोधी वीडियो का प्रदर्शन
प्राचार्य प्रो. चौधरी ने स्पष्ट किया कि किसी भी जूनियर छात्र के साथ अशिष्टता, अभद्रता या परेशान करने की कोई भी हरकत “रैगिंग” की श्रेणी में आएगी और इसके लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।
एंटी-रैगिंग सप्ताह का आयोजन:
कॉलेज ने एंटी-रैगिंग सप्ताह मनाने का निर्णय लिया है, जिसमें कई गतिविधियाँ आयोजित की जाएंगी:
– उद्घाटन समारोह
– नारा लेखन, निबंध लेखन, पोस्टर निर्माण, लोगो डिज़ाइनिंग
– नुक्कड़ नाटक, फ़ोटोग्राफ़ी, प्रश्नोत्तरी व वाद-विवाद प्रतियोगिताएं
– प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और पुरस्कार
– सोशल मीडिया और वेबसाइट पर रैगिंग विरोधी संदेशों का प्रसार
– परिसर में ‘सेल्फी कॉर्नर’ और डिजिटल रचनात्मक गतिविधियाँ
– राष्ट्रीय स्तर की रील, पोस्टर व लघु फिल्म प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए प्रेरणा
समिति के सदस्य और मीडिया संयोजक डॉ. हंसराज सुमन ने बताया कि यूजीसी ने रैगिंग रोकने के लिए जो नियम बनाए हैं, वे सभी संस्थानों के लिए अनिवार्य हैं। कॉलेज पूरी सख्ती के साथ इनका अनुपालन करेगा।




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