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NAAC की नई प्रणाली: अब एआई से होगा कॉलेजों का मूल्यांकन, फिजिकल निरीक्षण बंद

भारत में कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मान्यता देने वाली संस्था राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) अगस्त 2025 से मूल्यांकन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। अब कॉलेजों में टीम भेजकर निरीक्षण नहीं किया जाएगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से सभी दस्तावेजों का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाएगा।

NAAC के अध्यक्ष प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे ने बताया कि इस नई व्यवस्था से प्रक्रिया तेज होगी और अधिक संस्थानों को शीघ्र मान्यता दी जा सकेगी। उनका लक्ष्य है कि अगले पांच वर्षों में देश के 90% कॉलेज और विश्वविद्यालय मान्यता प्राप्त हो जाएं।

नई मूल्यांकन प्रणाली की प्रमुख बातें:
अब दस्तावेज आधारित मूल्यांकन
नई व्यवस्था में फिजिकल विजिट की आवश्यकता नहीं होगी, विशेषकर प्रारंभिक मान्यता के लिए। मूल्यांकन पूरी तरह दस्तावेजों और ऑनलाइन डेटा के आधार पर किया जाएगा।

AI और क्राउड-सोर्सिंग का उपयोग
AI तकनीक संस्थानों के डेटा की जांच करेगी। साथ ही, मूल्यांकन के लिए 100 से अधिक विशेषज्ञों को भेजे जाएंगे सवाल, जिनके उत्तरों के आधार पर “विश्वसनीयता स्कोर” (0 से 1 के बीच) तैयार किया जाएगा।

दो श्रेणियां: मान्यता प्राप्त या नहीं
नई प्रणाली में संस्थानों को केवल दो श्रेणियों में बांटा जाएगा:
– मान्यता प्राप्त
– मान्यता प्राप्त नहीं

आवश्यक न्यूनतम अंक:
– विश्वविद्यालय: 50%
– स्वायत्त कॉलेज: 45%
– संबद्ध कॉलेज: 40%

उच्च स्तर की ग्रेडेड मान्यता: 5 स्तरों का सिस्टम
बेसिक मान्यता के बाद, संस्थान पांच स्तरों की परिपक्वता आधारित ग्रेडेड प्रणाली में भाग ले सकेंगे (लेवल 1 से लेवल 5 तक)।
जैसे-जैसे स्तर बढ़ेगा, मूल्यांकन के मानकों की संख्या और कठिनाई भी बढ़ेगी।
उदाहरण:
लेवल 1 पर 55 मानक
लेवल 5 तक बढ़कर 80–100 मानक

फिजिकल निरीक्षण केवल लेवल 3, 4 और 5 पर
इन स्तरों पर भी निरीक्षण आंशिक रूप से ऑनलाइन और आंशिक रूप से साइट पर जाकर किया जाएगा।

डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और ट्रैकिंग भी हाईटेक
– हर संस्थान को प्रारंभ में 0.5 का विश्वसनीयता स्कोर दिया जाएगा।
– सटीक दस्तावेज़ों पर स्कोर बढ़ेगा, गलत दस्तावेज़ों पर घटेगा।
– विशेषज्ञों की भी निगरानी AI से की जाएगी, पारदर्शिता बनाए रखने हेतु।

यदि दस्तावेज़ फर्जी पाए गए:
संस्थान की मान्यता तीन वर्षों के लिए रद्द की जा सकती है।

नीति आधारित बदलाव: शिक्षा मंत्रालय की सिफारिशों पर आधारित
नई प्रणाली का खाका पूर्व इसरो प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों पर आधारित है, जिसका गठन नवंबर 2022 में हुआ था।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की विशेषताओं को मिला स्थान
नई प्रणाली में नवाचार, बहुभाषावाद, मल्टी एंट्री-एग्जिट, स्थिरता, और अंतर्राष्ट्रीयकरण जैसी विशेषताएं भी शामिल हैं।

विदेशी विश्वविद्यालय जो भारत में कैंपस खोलना चाहते हैं, वे भी अब इसी प्रणाली के तहत मान्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे।

अध्यक्ष की टिप्पणी:
“हम भरोसा करते हैं, लेकिन जांच के साथ। यह प्रणाली भारत में ही विकसित की गई है और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।”

 

Asmita Sarkar

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