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IIT खड़गपुर में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए ‘डीन’ का नया पद सृजित, चार आत्महत्याओं के बाद लिया फैसला

आईआईटी खड़गपुर ने जनवरी से अब तक चार हॉस्टल छात्रों की संदिग्ध आत्महत्या की घटनाओं के बीच, छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और भलाई को मजबूत करने के लिए ‘डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलबीइंग’ का नया पद सृजित किया है। इस पद का उद्देश्य छात्रों से सीधे संवाद कर उनकी मानसिक स्थिति को समझना और हर परिस्थिति में सहयोग प्रदान करना है।

5 अगस्त को हुई नियुक्ति
संस्थान के निदेशक सुमन चक्रवर्ती ने बताया कि सेंटर फॉर ओशन, रिवर, एटमॉस्फियर एंड लैंड साइंसेज के प्रोफेसर अरुण चक्रवर्ती को 5 अगस्त को इस पद पर नियुक्त किया गया है और उन्होंने कार्यभार संभाल लिया है। अरुण चक्रवर्ती बीटेक के नए छात्रों के इंडक्शन कार्यक्रम से जुड़े रहे हैं और उनकी चुनौतियों से अच्छी तरह परिचित हैं।

निदेशक के अनुसार, यह पद पहली बार विशेष रूप से छात्रों की भलाई, उनके सर्वांगीण विकास और निरंतर सहायता के लिए बनाया गया है। वे केवल दफ्तर में बैठकर नहीं, बल्कि ग्राउंड लेवल पर समूहों और व्यक्तिगत मुलाकातों के माध्यम से छात्रों से जुड़ेंगे, शिक्षक और मित्र—दोनों की भूमिका निभाते हुए।

देश में अपनी तरह का पहला कदम
संभवतः यह देश के किसी भी संस्थान में पहली बार है जब ‘डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलबीइंग’ जैसा पद स्थापित किया गया है, जो मौजूदा डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के साथ मिलकर काम करेगा। जहां डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स प्रशासनिक और शैक्षणिक विषयों पर केंद्रित होते हैं, वहीं डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलबीइंग का मुख्य फोकस छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर रहेगा।

पृष्ठभूमि और संस्थान की सोच
जनवरी से जुलाई के बीच हुई चार आत्महत्याओं के बाद यह निर्णय लिया गया। हाल ही में, 18 जुलाई को चौथे वर्ष के मैकेनिकल इंजीनियरिंग छात्र रितम मंडल अपने हॉस्टल कमरे में फांसी पर लटके पाए गए थे। IIT खड़गपुर में 21 हॉस्टल हैं, जिनमें लगभग 16,000 छात्र रहते हैं।

निदेशक ने कहा, “हम नहीं चाहते कि हमारे किसी भी छात्र को अनावश्यक दबाव और तनाव का सामना करना पड़े। पहले, माता-पिता निश्चिंत रहते थे कि उनके बच्चों की पढ़ाई, इंटर्नशिप और अतिरिक्त गतिविधियों का पूरा ख्याल रखा जाएगा। आज भी हम यही कर रहे हैं, लेकिन बदलते सामाजिक-आर्थिक माहौल ने छात्रों की मानसिक स्थिति पर असर डाला है।”

वे हर महीने अभिभावकों से संवाद करते हैं, ताकि छुट्टियों के दौरान भी छात्रों पर अतिरिक्त तनाव न आए, और यह सुनिश्चित हो सके कि संस्थान हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा है।

 

Asmita Sarkar

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