
केरल सरकार ने बच्चों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए ‘सुरक्षा मित्रम’ योजना शुरू करने की घोषणा की है। यह कदम एक तटीय जिले में चौथी कक्षा की बच्ची के साथ उसके पिता और सौतेली मां द्वारा कथित दुर्व्यवहार की घटना के बाद उठाया गया है।
“बच्चों के खिलाफ हिंसा किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं” — वी. शिवनकुट्टी
राज्य के सामान्य शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने शनिवार को इस योजना की घोषणा करते हुए कहा कि सरकार ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से ले रही है और पीड़ित बच्चों को सभी आवश्यक सुरक्षा व सहायता प्रदान की जाएगी। बच्ची से मुलाकात के बाद उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जोर देकर कहा कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।
कार्य योजना के मुख्य बिंदु
पीड़ित बच्चों की पहचान: योजना का मुख्य उद्देश्य दुर्व्यवहार का शिकार बच्चों को पहचानना और उन्हें सुरक्षित माहौल देना है।
स्कूलों में ‘हेल्प बॉक्स’: सभी स्कूलों में एक विशेष बॉक्स लगाया जाएगा, जिसमें छात्र अपनी समस्याएं लिखकर डाल सकेंगे। इसे सप्ताह में कम से कम एक बार खोला जाएगा और रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेजी जाएगी।
शिक्षकों का विशेष प्रशिक्षण: बच्चों के व्यवहार में बदलाव को पहचानने और समस्याओं को समय रहते पकड़ने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
मैत्रीपूर्ण वातावरण: छात्रों को डायरी लिखने, जीरो पीरियड सत्र और खुली बातचीत के माध्यम से अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
हालिया मामला ऐसे सामने आया
हाल ही में यह घटना तब उजागर हुई जब एक शिक्षिका ने बच्ची की नोटबुक में उसके साथ हुए शारीरिक दुर्व्यवहार का उल्लेख देखा। इसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में आया।
अंतर-विभागीय समन्वय और समर्थन
यह योजना महिला एवं बाल विकास, सामाजिक न्याय, स्थानीय स्वशासन, स्वास्थ्य और पुलिस विभागों के सहयोग से लागू होगी। कठिनाइयों का सामना कर रहे अभिभावकों को परामर्श देने के लिए मौजूदा पेरेंटिंग क्लीनिकों को मजबूत किया जाएगा। साथ ही, जरूरतमंद बच्चों के लिए विशेष गृह और सुविधाओं का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
मंत्री शिवनकुट्टी ने कहा कि सार्वजनिक शिक्षा निदेशक जल्द ही बच्चों की सुरक्षा और संरक्षण के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करेंगे, ताकि राज्य में हर बच्चे को सुरक्षित और सहायक वातावरण मिल सके।




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