
बिहार में लगातार पुल टूटने की घटनाओं के बाद राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार अब इंजीनियरों को तकनीकी रूप से और सक्षम बनाने के लिए स्पेशल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रही है। इसके लिए बिहार सड़क निर्माण विभाग (BRCD) ने आईआईटी दिल्ली से टाई-अप किया है।
6 महीने का सर्टिफिकेट कोर्स
आईआईटी दिल्ली इस साझेदारी के तहत 6 महीने का सर्टिफिकेट प्रोग्राम लॉन्च करेगा। इसमें इंजीनियरों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से पुलों का डिजाइन तैयार करना, निर्माण कार्य की निगरानी करना और बाद में उनका रखरखाव करना सिखाया जाएगा। करीब 100 से ज्यादा सरकारी इंजीनियर इसमें शामिल होंगे। उन्हें ड्रोन, सेंसर्स और एआई टूल्स के जरिए पुलों की स्थिति समझने और समय रहते सुधार करने की ट्रेनिंग मिलेगी।
बिहार राज्य पुल प्रबंधन एवं रखरखाव नीति 2025
यह सर्टिफिकेट कोर्स हाल ही में मंजूर की गई बिहार राज्य पुल प्रबंधन एवं रखरखाव नीति 2025 का हिस्सा है। इस नीति का मकसद प्राइवेट कंसल्टेंट्स पर निर्भरता कम करना और सरकारी इंजीनियरों को ज्यादा काबिल बनाकर पुलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
IAHE से भी ट्रेनिंग की तैयारी
इसी तरह एक और ट्रेनिंग प्रोग्राम के लिए इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स (IAHE) से बातचीत चल रही है। इसका फोकस रोड और ब्रिज स्ट्रक्चर्स के डिजाइन पर होगा, ताकि राज्य के पास विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम तैयार हो सके।
बनेगा ब्रिज डिजाइन सेल
सरकार राज्य में एक ब्रिज डिजाइन सेल भी बनाएगी, जो बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) के तहत काम करेगा। इसका काम होगा ब्रिज, कल्वर्ट और रिटेनिंग वॉल्स के डिजाइन तैयार करना। सरकार का दावा है कि इससे सालाना 65 करोड़ रुपये की बचत होगी और पुल निर्माण में लगने वाला समय भी कम किया जा सकेगा।




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