
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गरीब बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की व्यवस्था में संशोधन करते हुए अब इसे और सख्त नियमों और कड़ी निगरानी के साथ लागू कर दिया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी और इसके लिए माता-पिता तथा बच्चे का आधार कार्ड अनिवार्य रहेगा।
आयु सीमा और समितियाँ
पूर्व-प्राथमिक कक्षाओं के लिए आयु सीमा: 3 से 6 वर्ष
कक्षा 1 के लिए आयु सीमा: 6 से 7 वर्ष
पहली बार जिलास्तर पर क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण समिति गठित की गई है, जिसकी अध्यक्षता डीएम करेंगे। विवाद समाधान के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता सीडीओ करेंगे।
किसे मिलेगा लाभ?
– अनुसूचित जाति, जनजाति, सामाजिक व शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को।
– अनाथ, निराश्रित, एचआईवी/एड्स व कैंसर पीड़ित अभिभावकों के बच्चों को।
– दिव्यांगजन परिवारों के बच्चों को।
– ऐसे परिवार जिनकी वार्षिक आय ₹1 लाख तक है।
पारदर्शी प्रवेश प्रक्रिया
– सभी आवेदन www.rte25.upsdc.gov.in पोर्टल पर होंगे।
– विद्यालयों को अपनी उपलब्ध सीटें पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी।
– चयनित छात्रों की सूची सार्वजनिक की जाएगी।
बच्चों की फीस सरकार देगी और ड्रेस व किताबों के लिए अभिभावकों के खाते में ₹5,000 वार्षिक सहायता भेजी जाएगी।
फर्जी दस्तावेज़ और मनमानी पर रोक
फर्जी अभिलेखों से प्रवेश कराने की कोशिश पर अभिभावकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। यदि कोई विद्यालय आवंटित बच्चे को बिना उचित कारण के प्रवेश से वंचित करता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है।
ऑनलाइन सत्यापन और फीस प्रतिपूर्ति
विद्यालयों को बच्चों का डेटा आरटीई व यू-डायस पोर्टल पर दर्ज कर अपार आईडी बनाना अनिवार्य होगा। अपार आईडी के बिना फीस प्रतिपूर्ति नहीं मिलेगी। फीस प्रतिपूर्ति और सहायता राशि का भुगतान तभी होगा जब जिला स्तरीय अधिकारी विद्यालयों द्वारा भेजे गए बिल और मांग पत्र का शत-प्रतिशत सत्यापन करेंगे। खंड शिक्षा अधिकारी प्रत्येक तिमाही में विद्यालयों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे।




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