
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सत्र 2025-26 के लिए छात्रों के एलओसी (Candidates List) से जुड़ी एपीएएआर आईडी जमा करने की अनिवार्यता में आंशिक छूट देने की घोषणा की है।
एपीएएआर (Automated Permanent Academic Account Registry) एक डिजिटल पहचान प्रणाली है, जिसका उद्देश्य छात्रों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को आजीवन सुरक्षित रखना है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि यह आईडी छात्रों और स्कूलों दोनों के लिए पारदर्शिता, जवाबदेही और निर्बाध शैक्षणिक गतिविधियों को सुनिश्चित करने में मददगार है। इसके संबंध में बोर्ड 30 जुलाई 2025 और 27 अगस्त 2025 को परिपत्र भी जारी कर चुका है।
एपीएएआर आईडी के लाभ
– हर छात्र की एक स्थायी और आजीवन शैक्षणिक पहचान होती है।
– स्कूल या कक्षा बदलने पर रिकॉर्ड प्रभावित नहीं होते।
– विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों के बीच अंक और क्रेडिट का आदान-प्रदान आसान हो जाता है।
– प्रवेश और नौकरी के लिए पहचान और सत्यापन सुगम बनता है।
– छात्रों की प्रगति और कौशल विकास का विश्लेषण करना सरल हो जाता है।
संभावित चुनौतियाँ
बोर्ड ने माना कि स्कूलों को कुछ व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है—
– अलग-अलग पोर्टलों पर डेटा मिलान करना कठिन होना।
– आधार और स्कूल रिकॉर्ड में अंतर आना।
– सुधार और अपडेट प्रक्रिया में समय लगना।
– अभिभावकों की सहमति न मिलना।
स्कूलों के लिए दिशा-निर्देश
यदि अभिभावक सहमति नहीं देते और एपीएएआर आईडी नहीं बन पाती, तो स्कूल को उनके इनकार की प्रति सुरक्षित रखनी होगी और एलओसी में “अस्वीकार” दर्ज करना होगा। यदि किसी तकनीकी कारण से आईडी जनरेट नहीं होती, तो एलओसी में “नोजेन” दर्ज किया जाएगा। अन्य सभी स्थितियों में छात्र की एपीएएआर आईडी अवश्य प्रदर्शित की जाएगी।
बोर्ड का कहना है कि इन निर्देशों से स्कूल एलओसी को निर्धारित समय सीमा में सही और त्रुटिरहित तरीके से जमा कर पाएंगे। किसी भी समस्या की स्थिति में स्कूल अपने संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।




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