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कंप्यूटर साइंस के बाद मैकेनिकल, सिविल, केमिकल और इलेक्ट्रिकल में सबसे ज्यादा नौकरी; रिपोर्ट में खुलासा

बीटेक में कंप्यूटर साइंस के बाद मैकेनिकल, सिविल, केमिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग सबसे अधिक रोजगार देने वाली शाखाएं साबित हो रही हैं। एआईसीटीई (अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद) की पिछले पाँच वर्षों की रिपोर्ट के अनुसार, कंप्यूटर साइंस में 94.46% विद्यार्थियों को नौकरी मिली है। वहीं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में 66.48%, केमिकल में 59.28%, इलेक्ट्रिकल में 58.58% और सिविल इंजीनियरिंग में 41.88% छात्रों को प्लेसमेंट हासिल हुआ है।

रिपोर्ट बताती है कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 से 2024-25 के बीच इंजीनियरिंग के सभी प्रमुख ब्रांचों में प्लेसमेंट का आंकड़ा 7.39 लाख से बढ़कर 8.5 लाख से ऊपर पहुंच गया है। यहां तक कि कोरोना महामारी के दौरान भी इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी की मांग बरकरार रही। सत्र 2020-21 में 5.80 लाख छात्रों को कैंपस प्लेसमेंट मिला था, जबकि 2024-25 में यह संख्या 6.05 लाख से अधिक हो गई। एआईसीटीई अध्यक्ष प्रो. टी.जी. सीताराम के अनुसार, मान्यता प्राप्त कॉलेजों में प्लेसमेंट में लगातार बढ़ोतरी हुई है, जो लगभग 15% की मजबूत वृद्धि को दर्शाती है।

इस सफलता का बड़ा कारण है—पाठ्यक्रम में उद्योग की मांग के अनुसार किए गए बदलाव, प्रशिक्षण व इंटर्नशिप कार्यक्रम और उद्योग के साथ बेहतर साझेदारी। आंकड़े यह साबित करते हैं कि तकनीकी शिक्षा भारत के कुशल कार्यबल की रीढ़ बनी हुई है।

भारत कौशल रिपोर्ट 2025: कंप्यूटर साइंस शीर्ष पर
भारत कौशल रिपोर्ट 2025 भी इस प्रवृत्ति की पुष्टि करती है। बीई और बीटेक ग्रेजुएट्स की रोजगार क्षमता में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग (CSE) 78% के साथ सबसे आगे है। इसके बाद सूचना प्रौद्योगिकी (75%), इलेक्ट्रॉनिक्स व संचार (72%), इलेक्ट्रिकल (68%), बायोटेक (65%) और मैकेनिकल इंजीनियरिंग (60%) का स्थान है। यह स्थिति दर्शाती है कि पारंपरिक इंजीनियरिंग शाखाओं में भी उद्योग-अकादमिक समन्वय को और मज़बूत बनाने की आवश्यकता है।

Asmita Sarkar

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