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चंपारण के आदर्श की ग्लोबल पहचान, बने ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज 2025 फाइनलिस्ट

बिहार के चंपारण में जन्मे आदर्श कुमार पर आज पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है। वे ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज 2025 के फाइनल में जगह बनाने वाले एकमात्र भारतीय छात्र हैं। इस पुरस्कार को बच्चों का “नोबेल प्राइज” भी कहा जाता है। महज 18 साल की उम्र में आदर्श ने यह मुकाम हासिल किया है, लेकिन उनका संघर्ष बहुत पहले, 14 साल की उम्र में ही शुरू हो गया था, जब उन्होंने सपनों को पूरा करने के लिए घर छोड़ दिया था।

गरीबी और बिजली संकट के बीच पला बचपन
गरीब किसान परिवार से आने वाले आदर्श का बचपन कठिनाइयों में बीता। गांव में बिजली की कमी ने पढ़ाई को लगभग असंभव बना दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और पढ़ाई जारी रखी। उनकी मेहनत रंग लाई, जब उन्हें जयपुर के जयश्री पेरिवाल इंटरनेशनल स्कूल में दाखिला मिला और 30 लाख रुपये की स्कॉलरशिप हासिल हुई। यह उपलब्धि उनके जीवन का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई और उन्होंने दूसरों के लिए भी रास्ता बनाया।

स्किल्जो: ग्रामीण बच्चों के लिए नई उम्मीद
स्कॉलरशिप मिलने के बाद आदर्श ने यह ठाना कि वे वंचित और ग्रामीण छात्रों के लिए उच्च शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए उन्होंने स्किल्जो नामक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शुरू किया। यह प्लेटफॉर्म स्किल डेवलपमेंट, मेंटरशिप और स्कॉलरशिप अवसर प्रदान करता है। आदर्श के प्रयासों से अब तक सैकड़ों छात्रों को प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश मिल चुका है।

उनका यह प्रोजेक्ट ग्रामीण भारत में शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी काम करता है। AI-आधारित टूल्स की मदद से हजारों छात्रों को मेंटरिंग दी गई है। आदर्श का मानना है—“शिक्षा ही असली बदलाव का हथियार है।”

ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज में भारतीय प्रतिनिधि
आदर्श की मेहनत और नवाचार ने उन्हें ग्लोबल स्टूडेंट प्राइज 2025 के फाइनल तक पहुंचा दिया। इस पुरस्कार के लिए 148 देशों से 11,000 छात्रों ने आवेदन किया था। आदर्श पहले टॉप 50 और फिर टॉप 10 फाइनलिस्ट्स में शामिल हुए। यह उपलब्धि उन्हें न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रेरणास्रोत बनाती है। विजेता को 100,000 अमेरिकी डॉलर की राशि प्रदान की जाएगी।

अगर जीत गए तो…
आदर्श ने कहा है कि पुरस्कार की राशि से वे स्किल्जोएक्स नामक AI-पावर्ड मेंटरशिप टूल लॉन्च करेंगे, जो ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा। इसके अलावा वे इग्नाइट फेलोशिप शुरू करेंगे, जिससे वैश्विक छात्र इनोवेटर्स को सपोर्ट मिलेगा।

आदर्श कहते हैं— “चंपारण की मिट्टी ने मुझे सिखाया कि सपने बड़े हो सकते हैं, भले ही शुरुआत छोटी हो।”

उनकी यह यात्रा लाखों ग्रामीण युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो दिखाती है कि शिक्षा और उद्यमिता से दुनिया बदली जा सकती है। विजेता की घोषणा अगले महीने होगी।

Asmita Sarkar

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