
आईआईटी कानपुर ने एक अनोखी ‘चिड़िया’ तैयार की है, जो दुश्मनों पर नजर रखने में मदद करेगी। संस्थान के अनस्टेडी एयरोडायनैमिक्स विभाग ने एक ऑटोनोमस ऑर्निथॉप्टर विकसित किया है, जो बिल्कुल पक्षियों की तरह पंख फड़फड़ाकर उड़ सकता है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बना यह ड्रोन प्रो. देवोपम दास के मार्गदर्शन में शोधार्थी श्रमन दास ने डिजाइन किया है। इसे अलग-अलग आकारों में तैयार किया गया है—सबसे बड़े ड्रोन के पंख 1.6 मीटर लंबे हैं, जबकि सबसे छोटा केवल 5 इंच का है। इसे पहली बार यूपी में आयोजित ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स इनोवेशन समिट 2025 में प्रदर्शित किया गया।
आईआईटी कानपुर और एलुमनी एसोसिएशन की ओर से आयोजित इस आयोजन में शिक्षाविदों, उद्यमियों, निवेशकों और नीति विशेषज्ञों ने भाग लिया। 25 से अधिक ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स और कई स्टार्टअप्स ने भी अपनी भागीदारी दर्ज की। प्रदर्शनी में स्मार्ट मीटर, स्मार्ट बोर्ड, लैपटॉप चार्जिंग बैग, रोबोट और ड्रोन जैसे इनोवेटिव प्रोडक्ट्स पेश किए गए।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रमुख सचिव (प्लानिंग) आलोक कुमार, निवेश यूपी के सीईओ विजय किरन आनंद, जय शंकर शर्मा और संस्थान के उप निदेशक प्रो. बृजभूषण ने किया। श्रमन दास के अनुसार, ऑर्निथॉप्टर में मेटल का इस्तेमाल बेहद कम है, जिससे यह दुश्मन के रडार से बच निकलता है। यह ड्रोन एक घंटे तक उड़ान भर सकता है, 300–400 मीटर की दूरी तय कर सकता है और एक किमी की ऊंचाई तक पहुंच सकता है। इसमें कैमरा, सेंसर और जीपीएस-आधारित स्वायत्त नियंत्रण प्रणाली लगी है, जो इसे पायलट के बिना उड़ान भरने में सक्षम बनाती है।
लैपटॉप चार्जिंग का नया समाधान
यात्रा के दौरान लैपटॉप चार्जिंग की समस्या से परेशान बिजनेसमैन, शोधार्थी, प्रोफेसर और छात्र अब राहत पा सकते हैं। पीएसआईटी के छात्रों ने इस चुनौती का हल निकाला है। बीबीए तृतीय वर्ष के छात्र ध्रुव और बीटेक (कंप्यूटर साइंस-एआई) की छात्रा श्रुति ने एडीएएस पावर सॉल्यूशन के तहत ऐसा इनोवेशन किया है, जिससे सूटकेस या बैग में रखते ही लैपटॉप चार्ज हो सकेगा।




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