
पिछले महीने यूजीसी ने गणित सहित कुल नौ विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम का ड्राफ्ट जारी कर सुझाव आमंत्रित किए थे। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए 900 से अधिक गणितज्ञों और शोधकर्ताओं ने गणित के ड्राफ्ट पाठ्यक्रम को “गंभीर खामियों से भरा” बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि यह पाठ्यक्रम लागू हुआ तो आने वाली पीढ़ियों के छात्रों के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
बीजगणित की अनदेखी
यूजीसी अध्यक्ष को भेजी गई याचिका में कहा गया है कि बीजगणित, रियल एनालिसिस और अनुप्रयुक्त गणित को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया है। याचिका में लिखा है, “बीजगणित की अनदेखी की गई है। स्नातक स्तर पर कम से कम तीन कोर्स बीजगणित पर होने चाहिए। गणित का भविष्य और देश का वैज्ञानिक प्रयास इसी पर निर्भर करता है।”
अनुप्रयुक्त गणित से समझौता
शोधकर्ताओं का कहना है कि अनुप्रयुक्त गणित से जुड़े महत्वपूर्ण विषय जैसे प्रोग्रामिंग, न्यूमेरिकल मैथड्स और सांख्यिकी या तो मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं हैं, या फिर उन्हें बेहद सतही तरीके से, बिना किसी व्यावहारिक प्रशिक्षण के शामिल किया गया है। याचिका में चेतावनी दी गई है कि सांख्यिकी को सिर्फ एक ही कोर्स तक सीमित करना और मशीन लर्निंग व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों की अनदेखी करना गंभीर चूक है।
पारंपरिक विधाओं पर जोर
ड्राफ्ट पाठ्यक्रम में पंचांग (भारतीय कैलेंडर) और उससे जुड़े मुहूर्त (शुभ समय) की जानकारी, कला गणपना (पारंपरिक समय मापन), भारतीय बीजगणित, पुराणों में वर्णित अंकगणित और ज्यामिति जैसी विधाओं को शामिल किया गया है। इसमें परावर्त्य योजयेत सूत्र जैसी वैदिक गणित तकनीक के जरिए बहुपदों के विभाजन की शिक्षा देने की सिफारिश भी की गई है।
समय-गणना परंपरा का उल्लेख
प्रस्तावित कोर्स में खगोलशास्त्र, पौराणिक कथाओं और संस्कृति का मिश्रण दिखाई देता है। इसमें भारत की प्राचीन समय-गणना परंपरा को विस्तार से पढ़ाया जाएगा। कोर्स में उज्जैन के प्राइम मेरिडियन, प्राचीन वेधशालाओं और वैदिक समय इकाइयों (जैसे—घटी और विघटी) की तुलना आधुनिक प्रणालियों जैसे ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) और भारतीय मानक समय (IST) से कराई जाएगी।




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