
काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (CISCE) ने किंडरगार्टन से कक्षा 8 तक के छात्रों के लिए पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। यह नया ढांचा शैक्षणिक सत्र 2027–28 से लागू होगा।
रटने से हटकर अनुभवात्मक शिक्षा पर जोर
रिपोर्ट के अनुसार, नया पाठ्यक्रम रटने की प्रवृत्ति से हटकर गतिविधि-आधारित और अनुभवात्मक शिक्षा पर केंद्रित होगा, जिसमें कक्षा का ज्ञान वास्तविक जीवन से जोड़ा जाएगा।
बेंगलुरु में आयोजित एक इंटर-स्कूल वाद-विवाद प्रतियोगिता में CISCE के चेयरमैन जोसेफ इमैनुएल ने इस बदलाव की रूपरेखा साझा करते हुए कहा: “हम किंडरगार्टन से कक्षा 8 तक के लिए नया प्लान ला रहे हैं। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के साथ लागू किया जाएगा और वैश्विक कौशल मानकों व प्रतिस्पर्धात्मक दक्षताओं से जोड़ा जाएगा।”
बहुविषयक शिक्षा पर फोकस
नए पाठ्यक्रम में मौजूदा ढांचे के कुछ तत्व बनाए रखे जाएंगे, लेकिन अधिक जोर अंतरविषयक और बहुविषयक सीखने पर होगा। छात्रों को अवधारणाओं का व्यावहारिक उपयोग सिखाने पर ध्यान दिया जाएगा, वहीं शिक्षकों को अधिक इंटरैक्टिव और गतिविधि-आधारित शिक्षण विधियों के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और नई पहलें
सुगम बदलाव सुनिश्चित करने के लिए CISCE एक समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च करेगा, जिसमें शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ पर्यावरण अध्ययन और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां भी शामिल होंगी। पाठ्यक्रम को NCERT मानकों से भी जोड़ा जाएगा।
इमैनुएल ने यह भी बताया कि बेंगलुरु में एक क्षेत्रीय CISCE कार्यालय स्थापित करने की योजना है, जहां करीब 400 संबद्ध स्कूल मौजूद हैं। वहीं, कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा का टाइमटेबल भी जल्द जारी किया जाएगा। इसके लिए CISCE, CBSE की तरह ही अग्रिम रूप से परीक्षा कार्यक्रम प्रकाशित करने की तैयारी कर रहा है।




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