
हिमाचल प्रदेश सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। अब राज्य के 100 से ज्यादा सरकारी स्कूल केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से जोड़े जाएंगे। इसके बाद इन स्कूलों में पढ़ाई CBSE पैटर्न पर होगी। साथ ही, लड़के और लड़कियों के अलग-अलग स्कूलों को मिलाकर को-एजुकेशन लागू की जाएगी। यह कदम उन अभिभावकों के लिए राहत की खबर है, जो अपने बच्चों को CBSE पैटर्न की शिक्षा दिलाना चाहते हैं।
क्यों खास है यह योजना?
पहले चरण में हाई स्कूल और सीनियर सेकेंडरी स्तर के 100+ स्कूलों को CBSE से संबद्ध किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इसकी सूची जारी कर दी है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों को आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है।
क्या है मकसद?
– CBSE पैटर्न से छात्रों को राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर अवसर मिलेंगे।
– को-एजुकेशन से बच्चों में आपसी समझ और समानता का भाव विकसित होगा।
– शिक्षा व्यवस्था को देशभर में एकरूप बनाने की दिशा में यह बड़ा कदम है।
स्कूलों को क्या करना होगा?
CBSE से संबद्धता के लिए स्कूलों को ज़रूरी दस्तावेज जमा करने होंगे, जैसे:
– लैंड रिकॉर्ड (स्कूल की जमीन का विवरण)
– बिल्डिंग सेफ्टी सर्टिफिकेट
– फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट
– पेयजल और स्वच्छता प्रमाणपत्र
ये सभी दस्तावेज CBSE के सारस 6.0 पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों का पालन अनिवार्य होगा।
किन जिलों के स्कूल होंगे शामिल?
लगभग हर जिले से स्कूल इस सूची में आए हैं।
बिलासपुर: 6 स्कूल
चंबा: 6 स्कूल
हमीरपुर: 11 स्कूल
कांगड़ा: 18 स्कूल (सबसे अधिक)
किन्नौर: 4 स्कूल
कुल्लू: 5 स्कूल
लाहौल-स्पीति: 2 स्कूल
मंडी: 10 स्कूल
सिरमौर: 7 स्कूल
सोलन: 9 स्कूल
ऊना: 7 स्कूल
शिमला: 13 स्कूल




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