
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में दशहरा कार्यक्रम के दौरान छात्र संगठनों के बीच हुए बवाल को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। इस घटना के बाद डीन ऑफ स्टूडेंट्स ऑफिस ने एक एडवाइजरी जारी करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से पहले पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य है। ऐसा न करने पर आयोजकों के खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की चेतावनी
एडवाइजरी में हॉस्टल निवासियों को सतर्क रहने और परिसर में शांति एवं सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उसे गुरुवार को छात्रों के दो गुटों के बीच झगड़े की जानकारी मिली थी और इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना जा रहा है।
जेएनयू प्रशासन ने कहा— “परिसर की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। हिंसा के किसी भी रूप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।”
प्रशासन ने छात्र संगठनों को हिंसा और कानून अपने हाथ में लेने से बचने की चेतावनी दी है।
दशहरा विवाद से भड़की सियासत
दशहरा कार्यक्रम के दौरान हुए बवाल ने छात्र राजनीति को गरमा दिया है। आगामी जेएनयू छात्र संघ चुनावों से पहले लेफ्ट संगठनों और एबीवीपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।
जेएनयू छात्र संघ की उपाध्यक्ष मनीषा ने आरोप लगाया कि “हर बार चुनाव नजदीक आते ही एबीवीपी ऐसे विवाद खड़े करती है। दशहरा और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जेएनयू की परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन इस बार इसे जानबूझकर धार्मिक रंग दिया गया।”
मनीषा ने कहा कि विवाद तब शुरू हुआ जब पूर्व छात्रों के पुतले रावण के रूप में जलाए गए, जिनमें उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे नाम शामिल थे—जबकि इनके मामलों पर अदालत का फैसला अभी लंबित है। विरोध दर्ज कराने पहुंचे छात्रों पर चप्पल फेंकी गईं और रंग डाला गया, जिसका संबंध दुर्गा विसर्जन से जोड़कर माहौल बिगाड़ा गया।
एबीवीपी का पलटवार
वहीं एबीवीपी के जेएनयू संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने जवाब देते हुए कहा— “लेफ्ट संगठनों की चुनावी जमीन खिसक चुकी है। अपनी हार की बौखलाहट में उन्होंने यह विवाद खड़ा किया। वामपंथी छात्रों ने दुर्गा पूजा विसर्जन यात्रा पर पत्थरबाजी और अभद्रता की।”
उन्होंने कहा कि एबीवीपी इस मामले की शिकायत पुलिस और प्रशासन से करेगी।
नवंबर में हो सकते हैं छात्र संघ चुनाव
सूत्रों के अनुसार, जेएनयू छात्र संघ चुनाव नवंबर के पहले सप्ताह में कराए जा सकते हैं। डीन ऑफ स्टूडेंट्स ऑफिस पहले ही चुनाव समिति संयोजक के चयन और जनरल बॉडी मीटिंग बुलाने के निर्देश जारी कर चुका है। नियमों के मुताबिक, पीएचडी सत्र शुरू होने के छह से आठ सप्ताह के भीतर चुनाव होते हैं—जो इस बार 12 सितंबर से आरंभ हुआ है।
जेएनयू प्रशासन अब पूरी कोशिश में है कि आगामी चुनाव से पहले परिसर में शांति बहाल की जाए और ऐसे किसी भी विवाद को दोबारा जन्म न मिले।




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