
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि डीम्ड-टू-बी और निजी विश्वविद्यालयों से संबद्ध कॉलेजों द्वारा दी जाने वाली डिग्रियां मान्य नहीं होंगी, क्योंकि यूजीसी ने इन विश्वविद्यालयों को अन्य कॉलेजों या संस्थानों को इस प्रकार से संबद्ध करने की अनुमति नहीं दी है।
यूजीसी ने छात्रों को सतर्क करते हुए बताया कि बेंगलुरु स्थित एमवर्सिटी नामक संस्थान अपने संबद्ध केंद्रों के साथ मिलकर निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों के साथ फ्रेंचाइजिंग, सहयोग या समझौते के माध्यम से डिग्री कार्यक्रम चला रहा है, जबकि उसे इसकी अनुमति नहीं दी गई थी। ऐसे में, इस संस्थान से प्राप्त सभी डिग्रियां अमान्य मानी जाएंगी।
अनधिकृत संस्थानों की डिग्रियां होंगी अवैध
यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि यूजीसी अधिनियम, 1956 के अनुसार केवल केंद्रीय, राज्य या प्रांतीय अधिनियमों के तहत स्थापित विश्वविद्यालय ही डिग्री प्रदान कर सकते हैं। इसी तरह, यूजीसी अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत डीम्ड-टू-बी विश्वविद्यालयों को भी डिग्री देने का अधिकार है।
हालांकि, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों को किसी अन्य कॉलेज या संस्थान को संबद्ध करने तथा उनके माध्यम से डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम चलाने की अनुमति नहीं है। इसलिए, ऐसे अनधिकृत केंद्रों या संबद्ध संस्थानों से दी गई सभी डिग्रियां और योग्ताएं अवैध मानी जाएंगी, और वे उच्च शिक्षा या रोजगार के लिए मान्य नहीं होंगी।
यूजीसी की अनुमति के बिना ऑफ-कैंपस सेंटर खोलना वर्जित
यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया है कि निजी विश्वविद्यालय बिना अनुमति के ऑफ-कैंपस, अध्ययन केंद्र या विस्तार केंद्र नहीं खोल सकते।
यूजीसी (निजी विश्वविद्यालयों में मानकों की स्थापना और मानकों के अनुरक्षण) विनियम, 2003 के तहत, भारत में कोई भी निजी विश्वविद्यालय यूजीसी की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी स्थान पर — यहां तक कि उसी राज्य के भीतर भी — ऑफ-कैंपस केंद्र या अध्ययन केंद्र स्थापित नहीं कर सकता। निजी विश्वविद्यालय केवल अपने मुख्य परिसर (मेन कैंपस) से ही डिग्री प्रोग्राम्स संचालित कर सकते हैं।
यूजीसी की यह सख्त कार्रवाई छात्रों को भ्रामक और अनधिकृत संस्थानों से बचाने के उद्देश्य से की गई है, ताकि उच्च शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और मानक बने रहें।




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