
केरल के थिरुवनंतपुरम स्थित एक सरकारी कृषि कॉलेज के छात्र अर्जुन ने फीस में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी के कारण अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी। थामरस्सेरी के रहने वाले अर्जुन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक वीडियो साझा किया है, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है और इसने सरकारी संस्थानों में शिक्षा की बढ़ती लागत पर बहस छेड़ दी है।
15,000 से बढ़कर 50,000 रुपये प्रति सेमेस्टर
अर्जुन ने मेरिट के आधार पर बीएससी एग्रीकल्चर (BSc Agriculture) में दाखिला लिया था। जब उन्होंने आवेदन किया, तब प्रॉस्पेक्टस में सेमेस्टर फीस 15,000 रुपये बताई गई थी, लेकिन दाखिले के बाद फीस बढ़ाकर 50,000 रुपये प्रति सेमेस्टर कर दी गई।
अर्जुन, जो एक छोटे किसान परिवार से आते हैं, का कहना है कि उनके माता-पिता के लिए इतनी भारी फीस देना नामुमकिन है। कॉलेज परिसर के बाहर रिकॉर्ड किए गए अपने वीडियो में उन्होंने कहा— “मैंने ट्रांसफर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर दिया है। लेकिन मेरा सवाल है – एक सरकारी कॉलेज मेरिट पर दाखिला पाने वाले छात्रों से इतनी भारी फीस कैसे वसूल सकता है?”
8 सेमेस्टर में 4 लाख रुपये का बोझ
नई फीस संरचना के मुताबिक, आठ सेमेस्टर का कोर्स पूरा करने में (हॉस्टल और अन्य खर्च छोड़कर) लगभग 4 लाख रुपये लगेंगे। छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि सरकारी कृषि कॉलेजों का मकसद हमेशा से ग्रामीण और किसान परिवारों के बीच शिक्षा को सुलभ बनाना रहा है, लेकिन अब यह बढ़ी हुई फीस उनके उद्देश्य को ही कमज़ोर कर रही है।
सोशल मीडिया पर बहस: सरकारी कॉलेज या निजी संस्थान?
अर्जुन के वीडियो ने उच्च शिक्षा तक पहुंच में बढ़ती असमानता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई लोगों ने यह मुद्दा उठाया है कि सरकारी कॉलेज अब निजी संस्थानों के बराबर फीस वसूलने लगे हैं।
इस घटना के बाद केरल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और राज्य सरकार से संशोधित शुल्क नीति की समीक्षा करने और यह सुनिश्चित करने की मांग उठी है कि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर न हों।
अभी तक नहीं आई विश्वविद्यालय की प्रतिक्रिया
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अभी तक इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है। लेकिन अर्जुन के वीडियो ने देशभर में उच्च शिक्षा में सामर्थ्य, समानता और निष्पक्षता पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
यह मामला इस कड़वी हकीकत को सामने लाता है कि शिक्षा, जो कभी सभी के लिए सुलभ और समान अधिकार मानी जाती थी, अब तेजी से बढ़ती फीस के कारण कई छात्रों की पहुंच से दूर होती जा रही है। यह उन हजारों छात्रों के लिए चेतावनी का संकेत है जो सरकारी संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का सपना देखते हैं।




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