
दिल्ली के सरकारी और निगम (एमसीडी) स्कूलों की स्थिति को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार के खिलाफ कड़ी टिपण्णी की है। सरकार को आड़े हाथों लेते हुए अदालत ने कहा कि उसे छात्रों की पढाई की कोई चिंता नहीं, मंत्री ने स्टूडेंट्स की दुर्दशा पर आंखें मूंद ली हैं और घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं। कोर्ट ने नाराजगी भरे लहजे में यहाँ तक कह डाला कि दिल्ली की मौजूदा सरकार की रुचि केवल सत्ता में है।
दरअसल, कोर्ट ने यह टिपण्णी उस जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिसमें एमसीडी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को अभी तक नए सेशन की कोर्स बुक नहीं मिलने और बच्चों के टिन शेड में पढ़ाई करने को मजबूर होने का मुद्दा उठाया गया है। दिल्ली हाईकोर्ट के एक्टिंग चीफ जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत पी.एस. अरोड़ा की बेंच ने कहा कि वह सोमवार, 29 अप्रैल को इस जनहित याचिका पर अपना फैसला सुनाएगी।
अपना पक्ष रखते हुए दिल्ली सरकार के वकील शादान फरासत ने बेंच को बताया कि उन्हें संबंधित मंत्री से निर्देश मिले हैं कि एमसीडी की स्थायी समिति की गैरमौजूदगी में उपयुक्त प्राधिकारी को ज्यादा शक्तियां सौंपने के लिए मुख्यमंत्री की सहमति की जरूरत होगी, जो अभी हिरासत में हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि क्योंकि वह जगह खाली है, इसका मतलब यह नहीं कि स्कूली बच्चों को किताबों के बिना पढ़ने दिया जाए।
इस पर अदालत ने दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज के रुख पर भी नाराजगी जताई और कहा कि एक अदालत के रूप में, किताबें, वर्दी आदि का वितरण… यह हमारा काम नहीं है। हम ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि कोई अपने काम में विफल हो रहा है… । दिल्ली के शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज ने स्टूडेंट की दुर्दशा पर आंखें मूंद ली हैं और घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि अब आप हमें उस रास्ते पर जाने के लिए मजबूर कर रहे हैं जिस पर हम नहीं जाना चाहते थे।… अगर आप चाहते हैं कि हम इस पर टिप्पणी करें, तो हम पूरी सख्ती के साथ ऐसा करेंगे। इन शब्दों के साथ हाई कोर्ट ने आदेश में सौरभ भारद्वाज का नाम भी डालने की चेतावनी दी।




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