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बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला : चुनाव की बिसात पर अब नौकरी बचाने की बात 

सियासी लड़ाई के चलते ही बात इतनी बढ़ी कि कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर कथित शिक्षा भर्ती घोटाला में हज़ारों शिक्षकों की नौकरी चली गई, लेकिन अब इन शिक्षकों के घाव पर मरहम लगाने के नाम पर भी नए सिरे से सियासत शुरू हो गयी है। एक तरफ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी इन सबके लिए भारतीय जनता पार्टी को कठघरे में खड़ा करते हुए किसी भी हाल में पीड़ित शिक्षकों के साथ खड़े रहने की बात दोहरा रही हैं, तो दूसरी तरफ अब भाजपा भी नौकरी से हाथ धो चुके शिक्षकों की हरसंभव मदद का वादा कर रही है। 

पश्चिम बंगाल के बर्धमान-दुर्गापुर में एक रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बंगाल भाजपा एक अलग कानूनी सेल बनाएगी, जो उन वास्तविक शिक्षकों को कानूनी मदद देगी, जिनकी नौकरी स्कूल सर्विस आयोग के घोटाले में चली गई है। यह अलग बात कि इन्हीं दोनों पार्टियों की सियासी लड़ाई में बात इतनी आगे चली गयी कि मामला अदालत की दहलीज पर पहुंचा और अंततः कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर कथित शिक्षा भर्ती घोटाला में हज़ारों शिक्षकों की नौकरी चली गई। यानी ये शिक्षक पहले भी सियासी बिसात पर मोहरा बने, लाभ-हानि देखते हुए इनकी नियुक्ति के नाम पर सियासत हुई, और अब, जब इनकी नौकरी जा चुकी है तो वोट की राजनीति के लिए फिर से इनके साथ खड़े रहने और इनकी मदद करने के नाम पर सियासत हो रही है।        

शायद यही वजह है तमाम चीज़ों को देखते-समझते प्रधानमंत्री मोदी को साथ में यह भी कहना पड़ रहा है कि वह चाहते हैं कि टीएमसी द्वारा किए गए घोटाले में जो लोग शामिल हैं, उन्हें सजा मिलनी चाहिए, लेकिन वह ये नहीं चाहते कि किसी निर्दोष को इससे परेशानी हो।उनका कहना है कि ‘बंगाल में टीएमसी ने स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में घोटाला किया, जो बेहद शर्मनाक है। इस घोटाले की वजह से कई योग्य और असल उम्मीदवारों को भी परेशानी उठानी पड़ी। मैंने भाजपा की बंगाल यूनिट से कहा है कि वे पार्टी की तरफ से एक अलग कानूनी सेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बनाएं, जिससे योग्य शिक्षकों को मदद मिल सके।’ 

इससे एक कदम आगे प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि ‘भाजपा ईमानदार उम्मीदवारों को मदद मुहैया कराएगी और उनकी लड़ाई लड़ेगी। यह मोदी की गारंटी है।’ बहरहाल गारंटी तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी दी थी, दे रही हैं लेकिन इन गारंटियों से नौकरी खो चुके हज़ारों हज़ार उन शिक्षकों के ज़ख्मों पर वाकई मरहम लग पायेगा, फिलहाल कहना मुश्किल है। उन्हें अपने सामने तो इस वक़्त एक लम्बी अँधेरी सुरंग ही नज़र आ रही है, जिसमें वे लगातार उतरते देख रहे हैं खुद को।   

गौरतलब है कि बीते हफ्ते ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने आदेश में चयन प्रक्रिया को गलत ठहराते हुए नियुक्तियों को खत्म करने का आदेश दिया था। इसके तहत चयनित हुए 26 हजार लोगों की नौकरी चली गई। हालांकि साथ ही हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आदेश दिया था, लेकिन क्या गारंटी है कि जो पिछली पर इस परीक्षा में पास हुए थे, वे आगे भी सफल ही हों।

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि एसएससी के जरिए साल 2014 में शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। साल 2016 में लोगों की भर्ती हुई। इसके बाद भर्ती प्रक्रिया में धांधली का आरोप लगाते हुए हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गयीं। मई 2022 में इसकी जांच सीबीआई को सौंपी गई। सीबीआई ने इस घोटाले में तत्कालीन शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को गिरफ्तार किया था। भाजपा शुरू से ही इन नियुक्तियों को लेकर पश्चिम बंगाल सरकार पर हमलावर रही और इसके खिलाफ सड़क से सदन तक आंदोलन किया।    

रईस अहमद 'लाली'

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