
सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली ह्सियन लूंग ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) की तारीफ़ करते हुए कहा है कि इनमें स्थान हासिल करना मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी या हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में प्रवेश पाने के बराबर है। पीएम लूंग ने कहा कि IIT-IIM भारत में शीर्ष संस्थान हैं और सिंगापुर, जो विश्व स्तर पर प्रतिभाओं की खोज करता है, में भारत के इन संस्थानों के स्नातकों की संख्या सबसे अधिक है। लूंग ने ये बातें चैनल न्यूज एशिया से एक साक्षात्कार में कहीं। बता दें कि लूंग 15 मई को सरकार के प्रमुख के रूप में अपना पद छोड़ने वाले हैं।
72 वर्षीय लूंग ने अपने व्यापक साक्षात्कार में आईआईटी-आईआईएम के पूर्व छात्रों की गुणवत्ता का बखान करते हुए सिंगापुर द्वारा विदेशी प्रतिभाओं को लाना जारी रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि आईआईटी-आईआईएम के पूर्व छात्रों ने सिंगापुर में एसोसिएशन बनाई हैं और समय-समय पर समारोह आयोजित करते हैं। अगर मुझे ऐसा कोई पूल मिल जाए, तो मैं यहां आऊं और काम करूं, यह हमारे लिए बहुत लाभकारी है।
उन्होंने भारत से सिंगापुर में आने वाली बड़ी श्रमशक्ति की महत्ता का भी ज़िक्र किया और कहा कि वे प्रतिभाशाली हैं और सिंगापुर के लिए बहुत मूल्यवान हैं, हमें उनका स्वागत करना चाहिए। हालांकि विदेशों से श्रमिकों के सिंगापुर आने को लेकर उत्पन्न चुनौतियों का भी उन्होंने उल्लेख किया और कहा कि “लोगों को सहज महसूस कराना और उन्हें खतरा महसूस न होने देना या सामाजिक तनाव पैदा न होने देना, यह कुछ ऐसा है जिसे प्रबंधित करना बहुत मुश्किल होता है मगर हमारे पास नकारात्मकता पर बहुत अधिक गुंजाइश नहीं है। हम यह नहीं कह सकते कि सभी विदेशी श्रमिकों को हटा दें, उन्हें वापस भेज दें और फिर सब ठीक हो जायेगा। सिंगापुर के लोगों द्वारा भरी जा सकने वाली नौकरियों से परे भी बड़े पैमाने पर कार्यों को करने के लिए अधिक जनशक्ति की आवश्यकता है।”




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