
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के सिंगरौली (Singrauli) जिले के खेखड़ा गांव के जयंतीलाल विश्वकर्मा (Jayantilal Vishwakarma) की कहानी आपको हैरान कर देगी। जयंतीलाल हकीकत में तो ज़िंदा है, स्वस्थ है। लेकिन सरकारी कागज़ों में उसकी मौत हो चुकी है। ज़िंदा जयंतीलाल स्कूल में दाखिला लेकर शिक्षा ग्रहण करना चाहता है, मगर सरकारी दस्तावेज़ों में मृत जयंतीलाल को स्कूल वाले दाखिला नहीं दे रहे। उससे उसके ज़िंदा होने का सबूत मांग रहे हैं। अपने ज़िंदा होने के प्रमाण जुटाने के लिए जयंतीलाल सालों से दर-दर की ठोकरें खा रहा है, लेकिन न तो अब तक वह खुद को ज़िंदा साबित करने में सफल हो पाया है और न ही स्कूल में दाखिला लेने में कामयाब।
दरअसल, जिले के देवसर जनपद के ग्राम पंचायत जोबगड़ के सचिव ने जिंदा युवक जयंतीलाल विश्वकर्मा पिता अरुण विश्वकर्मा को सरकारी कागजों में मृत घोषित कर दिया है। सरकारी कागजों में सचिव ने जयंतीलाल को 11 नवम्बर, 2022 में मृत घोषित कर दिया। बाकायदा समग्र पोर्टल पर भी यह जिंदा छात्र मर चुका है। और यही वजह है कि छात्र का अब किसी भी स्कूल में दाखिला नहीं हो रहा है। पंचायत सचिव की इस लापरवाही से न सिर्फ सालों से यह छात्र परेशान होकर इधर उधर भटक रहा है, बल्कि पढ़ने-लिखने की इस उम्र में शिक्षा से भी वंचित है।
पंचायत सचिव की इस परवाही ने छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर दिया है। हालांकि जयंतीलाल अपने परिजनों के साथ खुद को जिंदा साबित करने के लिए बीते सालों से लगातार कलेक्ट्रेट के चक्कर लगा रहा है, लेकिन अब तक उसे कामयाबी नहीं मिल पायी है। वह लगातार स्कूल के चक्कर भी काटता रहा ताकि किसी तरह उसका दाखिला हो जाए, लेकिन स्कूल वाले भी यह कह कर पल्ला झाड़ते रहे कि छात्र को तो सरकारी कागज़ों में मृत दिखा दिया गया है। पहले इसे दुरुस्त कराओ, फिर आना।
जब स्कूल दाखिले से नकारता तो जयंतीलाल खुद को जिंदा साबित करने के लिए कलेक्ट्रेट पहुँचता और जब वहां से नाउम्मीदी नज़र आती तो फिर स्कूल की राह पकड़ता। यही सालों से उसकी दिनचर्या बानी हुई है। और इस चक्कर में वह पढ़ाई से अब तक दूर है। शिक्षा के अधिकार का वह उपभोग नहीं कर पा रहा, शिक्षा से वंचित हो अपने ज़िंदा होने का सबूत जुटाने में लगा है। अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। हाँ, अब जाकर सिंगरौली जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह नागेश ने इस मामले में जांच के निर्देश ज़रूर दे दिए हैं।
मध्यप्रदेश के छात्र जयंतीलाल की यह कहानी हैरान करने वाली तो है ही, साथ ही केंद्र व राज्य सरकारों के शिक्षा पर विशेष फोकस देने के दावों की भी पोल खोलती है।
एक छात्र को सरकारी अमले की लापरवाही के चलते शिक्षा से वंचित रखना न सिर्फ एक इंसान के साथ, बल्कि समाज और पूरे राष्ट्र के साथ धोखा है।




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