
दिल्ली हाई कोर्ट ने INI-CET जुलाई 2026 के तहत पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स में सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया को चुनौती देने वाली एक याचिका पर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फाइनल सीट मैट्रिक्स और मॉक राउंड सीट अलॉटमेंट के बीच सीटों की संख्या में बड़ा अंतर था, जिससे सामान्य (UR) वर्ग के उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है।
मामले की सुनवाई 3 जुलाई को जस्टिस जसमीत सिंह की एकल पीठ के समक्ष हुई। अदालत ने AIIMS को नोटिस जारी कर अपना पक्ष दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2026 में होगी।
क्या है पूरा मामला?
याचिका एक उम्मीदवार के पिता की ओर से दायर की गई है, जिनकी ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे ने अदालत में पक्ष रखा। याचिका के अनुसार, AIIMS द्वारा मई 2026 में जारी फाइनल सीट मैट्रिक्स में M.D. ऑप्थल्मोलॉजी (नेत्र रोग) कोर्स के लिए कुल 13 सीटें दिखाई गई थीं। इनमें से पांच सीटें अनारक्षित (UR) श्रेणी के लिए निर्धारित थीं।
याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी बेटी ने INI-CET जुलाई 2026 परीक्षा में ऑल इंडिया 146वीं रैंक हासिल की थी और उसी फाइनल सीट मैट्रिक्स को आधार बनाकर काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लिया।
हालांकि, बाद में जारी मॉक राउंड सीट अलॉटमेंट में केवल दो ओपन UR सीटें दिखाई गईं। इसके अलावा एक सीट ‘Institutional Preference’ और एक सीट बेंचमार्क दिव्यांग (Benchmark Disability) श्रेणी के लिए दर्शाई गई। याचिकाकर्ता का दावा है कि इससे पहले जारी फाइनल सीट मैट्रिक्स और वास्तविक सीट अलॉटमेंट के बीच स्पष्ट अंतर सामने आया।
पारदर्शिता पर उठाए गए सवाल
याचिका में कहा गया है कि यदि किसी प्रवेश प्रक्रिया के लिए अंतिम सीट मैट्रिक्स जारी कर दिया जाता है, तो बिना स्पष्ट सूचना और सार्वजनिक कारण बताए सीटों की उपलब्धता में बड़ा बदलाव नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि उम्मीदवार फाइनल सीट मैट्रिक्स में उपलब्ध जानकारी के आधार पर अपनी काउंसलिंग रणनीति तैयार करते हैं। यदि बाद में सीटों की संख्या बदल दी जाती है और उसका कारण सार्वजनिक नहीं किया जाता, तो योग्य उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी के कारण ऐसे अभ्यर्थी, जो घोषित सीटों के आधार पर काउंसलिंग में शामिल हुए थे, प्रवेश से वंचित रह सकते हैं।
हाई कोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए AIIMS से इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत फिलहाल मामले के तथ्यों की जांच करेगी और यह देखेगी कि सीट मैट्रिक्स तथा सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता या प्रक्रिया संबंधी कमी हुई है या नहीं।
मामले की अगली सुनवाई अगस्त 2026 में निर्धारित की गई है। अदालत के अंतिम फैसले पर INI-CET 2026 की काउंसलिंग प्रक्रिया से जुड़े कई उम्मीदवारों की नजर रहेगी।
INI-CET क्या है?
INI-CET (Institute of National Importance Combined Entrance Test) देश के प्रमुख राष्ट्रीय महत्व के चिकित्सा संस्थानों में पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल कोर्स (MD, MS, MDS, DM, MCh) में प्रवेश के लिए आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा है। इसका आयोजन AIIMS, नई दिल्ली करता है। इस परीक्षा के माध्यम से AIIMS, JIPMER, PGIMER, NIMHANS और अन्य भाग लेने वाले संस्थानों में दाखिला दिया जाता है।
उम्मीदवारों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल काउंसलिंग प्रक्रिया पर कोई रोक नहीं लगाई गई है। हालांकि, यदि अदालत को सीट अलॉटमेंट प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी या पारदर्शिता की कमी नजर आती है, तो उसके निर्देश भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रिया और सीट आवंटन व्यवस्था पर प्रभाव डाल सकते हैं। ऐसे में INI-CET 2026 के उम्मीदवारों को AIIMS और अदालत की ओर से जारी होने वाले आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखनी चाहिए।




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