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ओडिशा में बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य के लिए नई SOP, स्कूल से विश्वविद्यालय तक लागू होंगे दिशा-निर्देश

बच्चों और युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव, चिंता और व्यवहार में बदलाव को देखते हुए ओडिशा सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक व्यापक पहल शुरू की है। इसके तहत आंगनबाड़ी केंद्रों से लेकर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों तक बच्चों और युवाओं की मानसिक सेहत पर ध्यान देने के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, उम्र के अलग-अलग चरणों को ध्यान में रखकर तैयार की गई Mental Health Guidebook का उद्देश्य बच्चों और युवाओं की मानसिक सेहत को मजबूत करना और समस्याओं की शुरुआती पहचान में मदद करना है। यह पहल स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, महिला एवं बाल विकास तथा कौशल विकास विभागों के संयुक्त प्रयास से तैयार की गई है।

बच्चों से सम्मानजनक व्यवहार पर जोर

दिशानिर्देशों में शिक्षकों और संस्थानों से जुड़े कर्मचारियों को बच्चों के साथ सम्मानजनक और सहयोगपूर्ण व्यवहार करने पर जोर दिया गया है। बच्चों को अपमानित करने या उनके आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचाने वाली भाषा से बचने की सलाह दी गई है।

किसी बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव को केवल अनुशासन की समस्या मानने के बजाय उसके पीछे मौजूद मानसिक दबाव और दूसरी परिस्थितियों को समझने की जरूरत पर जोर दिया गया है। ओडिशा की स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पहले से ही सकारात्मक अनुशासन और काउंसलिंग को लेकर शिक्षक प्रशिक्षण तथा छात्र शिकायत निवारण जैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

शुरुआती लक्षणों की पहचान पर फोकस

नई मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था में बच्चों और किशोरों के व्यवहार में लगातार दिखाई देने वाले बदलावों को गंभीरता से लेने की बात कही गई है। इनमें लगातार उदासी, डर, चिड़चिड़ापन, असामान्य व्यवहार और पढ़ाई या रोजमर्रा की गतिविधियों में रुचि कम होना जैसे संकेत शामिल हो सकते हैं।

ऐसे मामलों में समय रहते बच्चे से बातचीत, परिवार और संस्थान की मदद तथा जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करने पर जोर दिया गया है। इसका मकसद यह है कि परेशानी बढ़ने से पहले बच्चे को जरूरी सहायता मिल सके।

ओडिशा के स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य के सभी 30 जिलों में National Mental Health Programme लागू है। 32 जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाइयां भी काम कर रही हैं और राज्य में मोबाइल मानसिक स्वास्थ्य इकाइयां उपलब्ध हैं।

पढ़ाई के तनाव को कम करने के लिए भी सुझाव

दिशानिर्देशों में पढ़ाई और परीक्षा के दबाव को संभालने के लिए भी कुछ आसान उपाय बताए गए हैं। छात्रों को लंबे समय तक लगातार पढ़ने के बजाय बीच-बीच में छोटे ब्रेक लेने, गहरी सांस लेने का अभ्यास करने और पर्याप्त नींद लेने की सलाह दी गई है।

गाइडबुक में पढ़ाई के दौरान 25 मिनट के बाद पांच मिनट का ब्रेक लेने का सुझाव भी दिया गया है। इसका उद्देश्य पढ़ाई के बीच मानसिक थकान कम करना और छात्रों को बेहतर तरीके से ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है।

कॉलेज और विश्वविद्यालयों में बनेंगे मानसिक स्वास्थ्य केंद्र

उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए Mental Health and Well-being Centres स्थापित करने पर जोर दिया गया है।

कॉलेज और विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले युवाओं को घर से दूर रहने, रैगिंग, भेदभाव, नशे की समस्या, रिश्तों से जुड़ी परेशानियों और पढ़ाई या करियर के दबाव जैसी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। नए दिशा-निर्देश इन परिस्थितियों में छात्रों को समय पर सहायता देने और संस्थानों में ऐसा माहौल तैयार करने पर जोर देते हैं, जहां छात्र अपनी परेशानी खुलकर साझा कर सकें।

इन केंद्रों का उद्देश्य केवल समस्या सामने आने के बाद मदद करना नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, शुरुआती पहचान, समय पर सहायता और लगातार निगरानी की व्यवस्था को मजबूत करना भी है।

सरकार का लक्ष्य: समस्या बढ़ने से पहले मिले मदद

ओडिशा सरकार की यह पहल मानसिक स्वास्थ्य को केवल गंभीर स्थिति में उपचार से जोड़ने के बजाय स्कूल और कॉलेज स्तर पर शुरुआती सहायता से जोड़ती है। सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, उम्र के अलग-अलग चरणों के लिए तैयार Mental Health Guidebook का उद्देश्य बच्चों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और उनके समग्र विकास में मदद करना है।

इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि स्कूल, कॉलेज, परिवार और स्वास्थ्य सेवाएं इन दिशा-निर्देशों को जमीन पर किस तरह लागू करती हैं। बच्चों के व्यवहार में बदलाव को समय रहते पहचानना, उनसे बिना डर या शर्म के बात करना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता उपलब्ध कराना इस पूरी व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।

Raish Ahmed

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